
सहजन की खेती से बढ़ेगी किसानों की कमाई, मुफ्त प्रशिक्षण के साथ मिलेंगे 1000 पौधे
खेती से अपनी आमदनी बढ़ाने की सोच रहे किसानों के लिए सहजन की खेती (Moringa Farming) एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आ रही है। खासकर कम पानी वाले क्षेत्रों में सहजन किसानों के लिए फायदेमंद फसल साबित हो सकती है।
इसी को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन, बीकानेर द्वारा NABARD के सहयोग से किसानों के लिए सहजन आधारित कृषि प्रणाली पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।
इस पहल की खास बात यह है कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक किसान को 1,000 सहजन के पौधे मुफ्त दिए जाएंगे।
सहजन की खेती के लिए मिलेगा मुफ्त प्रशिक्षण
किसानों को केवल पौधे देना ही इस कार्यक्रम का उद्देश्य नहीं है। उन्हें सहजन की वैज्ञानिक खेती से लेकर पौधों की देखभाल, पोषण प्रबंधन, प्रसंस्करण और मार्केटिंग तक की जानकारी देने की योजना है।
तीन दिवसीय कृषक कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को यह समझाया जाएगा कि सहजन की खेती को आय का बेहतर स्रोत कैसे बनाया जा सकता है।
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन पौधे निःशुल्क दिए जाएंगे।
सहजन की खेती किसानों के लिए क्यों फायदेमंद है?
सहजन को मोरिंगा (Moringa) और ड्रमस्टिक के नाम से भी जाना जाता है। इसकी खासियत यह है कि इसकी पत्तियों से लेकर फलियां, फूल और बीज तक उपयोगी होते हैं।
सहजन कम पानी और शुष्क जलवायु में भी विकसित हो सकता है। इसलिए पानी की कमी वाले क्षेत्रों में इसकी खेती किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प हो सकती है।
सहजन के अलग-अलग हिस्सों का उपयोग खाद्य पदार्थ, पशु चारा, औषधीय एवं प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार करने में किया जाता है। इस कारण किसान केवल फलियां बेचने तक सीमित न रहकर इससे दूसरे उत्पाद तैयार करके भी आय के अवसर तलाश सकते हैं।
सहजन से तैयार किए जा सकते हैं कई उत्पाद
सहजन की खेती की खासियत इसका Value Addition भी है। किसान केवल ताजा सहजन बेचने के बजाय इसकी प्रोसेसिंग पर भी ध्यान दे सकते हैं।
सहजन की पत्तियों से पाउडर और अन्य प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं। इसी तरह फलियों और दूसरे उपयोगी हिस्सों से अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।
यदि किसान स्थानीय बाजार और खरीदार की मांग को समझकर प्रोसेसिंग और पैकेजिंग करें, तो कच्ची उपज बेचने की तुलना में अतिरिक्त आय के अवसर बन सकते हैं।
300 किसानों को मिलेंगे 3 लाख से ज्यादा पौधे
परियोजना के तहत बड़े स्तर पर किसानों को सहजन की खेती से जोड़ने की तैयारी की गई है।
शुरुआती चरण में बीकानेर जिले की विभिन्न तहसीलों से करीब 30 किसानों को प्रशिक्षण में शामिल किया गया है।
पूरी परियोजना के तहत बीकानेर जिले के लगभग 300 किसानों को 3 लाख से अधिक सहजन पौधे उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
इसका मतलब है कि चयनित और प्रशिक्षण पूरा करने वाले प्रत्येक किसान को 1,000 पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे।
बदलते मौसम में सहजन बन सकता है बेहतर विकल्प
जलवायु परिवर्तन के कारण खेती में मौसम का जोखिम लगातार बढ़ रहा है। कहीं कम बारिश तो कहीं अधिक तापमान किसानों की फसलों को प्रभावित कर रहा है।
ऐसे में कम पानी और शुष्क परिस्थितियों में उगने वाली फसलों की उपयोगिता बढ़ जाती है।
सहजन की खेती किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आय का एक अतिरिक्त स्रोत बनाने में मदद कर सकती है। खासकर पश्चिमी राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में इसका महत्व अधिक हो सकता है।
अगस्त में भी आयोजित होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम
किसानों की सहजन की खेती में बढ़ती रुचि को देखते हुए अगस्त में भी सहजन आधारित कृषि प्रणाली पर दो और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसलिए बीकानेर एवं आसपास के इच्छुक किसानों को ICAR-CAZRI के क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन से प्रशिक्षण की पात्रता, आवेदन और आगामी बैच की आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करते रहना चाहिए।
किसानों को प्रशिक्षण में क्या सिखाया जाएगा?
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को सहजन की खेती से जुड़ी कई जरूरी जानकारियां दी जाएंगी, जिनमें मुख्य रूप से:
- सहजन के पौधों का सही रोपण
- पौधों की देखभाल
- पोषण एवं फसल प्रबंधन
- सहजन की प्रोसेसिंग
- मूल्य संवर्धन (Value Addition)
- उत्पादों की मार्केटिंग
- सहजन आधारित कृषि मॉडल
शामिल हैं।
इससे किसानों को केवल पौधे लगाने की जानकारी नहीं मिलेगी, बल्कि सहजन को व्यावसायिक खेती के रूप में विकसित करने की समझ भी मिल सकती है।
सहजन की खेती से किसानों की कमाई कैसे बढ़ सकती है?
सहजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि किसान इससे कई तरह से आय प्राप्त करने की संभावना तलाश सकते हैं।
फलियों को बाजार में बेचा जा सकता है, पत्तियों की प्रोसेसिंग की जा सकती है और मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इसके अलावा किसान स्थानीय मांग के अनुसार दूसरे सहजन आधारित उत्पादों पर भी काम कर सकते हैं।
हालांकि वास्तविक कमाई उत्पादन, बाजार भाव, पौधों की किस्म, खेती की लागत और स्थानीय मांग पर निर्भर करेगी। इसलिए बड़े स्तर पर खेती शुरू करने से पहले स्थानीय बाजार और कृषि विशेषज्ञ से जानकारी लेना बेहतर रहेगा।
eKhetiBari की सलाह
यदि आप सहजन की खेती शुरू करने की योजना बना रहे हैं तो केवल मुफ्त पौधों को देखकर फैसला न करें। सबसे पहले अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई की उपलब्धता और स्थानीय बाजार की मांग को समझें।
प्रशिक्षण लेकर वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू करना और पहले से संभावित खरीदारों की जानकारी जुटाना सहजन की खेती को अधिक व्यावसायिक बनाने में मदद कर सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. सहजन की खेती का मुफ्त प्रशिक्षण कौन दे रहा है?
यह प्रशिक्षण ICAR के केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), क्षेत्रीय अनुसंधान स्टेशन, बीकानेर द्वारा NABARD के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
2. प्रशिक्षण के बाद कितने सहजन के पौधे मुफ्त मिलेंगे?
प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने वाले प्रत्येक किसान को प्रमाण-पत्र के साथ 1,000 सहजन पौधे निःशुल्क दिए जाने की जानकारी है।
3. कितने किसानों को योजना का लाभ मिलेगा?
परियोजना के तहत बीकानेर जिले के करीब 300 किसानों को 3 लाख से अधिक सहजन पौधे वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है।
4. सहजन की खेती का सबसे बड़ा फायदा क्या है?
सहजन कम पानी वाली परिस्थितियों में भी उग सकता है और इसकी पत्तियां, फलियां, फूल तथा बीज उपयोगी होते हैं। इसके कारण किसानों के लिए आय के अलग-अलग अवसर बन सकते हैं।
5. क्या सहजन की पत्तियों से भी कमाई हो सकती है?
हां, सहजन की पत्तियों का उपयोग पाउडर एवं अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद बनाने में किया जाता है। हालांकि कमाई स्थानीय मांग, गुणवत्ता और बाजार पर निर्भर करती है।
6. क्या पूरे भारत के किसानों को 1000 पौधे मुफ्त मिलेंगे?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह विशेष परियोजना बीकानेर जिले के चयनित किसानों के लिए है। इसलिए इसे पूरे भारत के किसानों के लिए उपलब्ध योजना नहीं समझना चाहिए।
निष्कर्ष
सहजन की खेती कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए आय बढ़ाने का एक संभावित विकल्प बन सकती है। ICAR-CAZRI और NABARD की इस पहल से किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण के साथ शुरुआती पौध सामग्री भी उपलब्ध होगी।
यदि प्रशिक्षण पूरा करने पर किसान को 1,000 सहजन पौधे मुफ्त मिलते हैं, तो इससे खेती शुरू करने की शुरुआती लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
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