बारिश लौटते ही खरीफ बुवाई में तेजी, जानें धान, सोयाबीन, मक्का और कपास का ताजा रकबा

देश के कई हिस्सों में मानसून की बारिश दोबारा सक्रिय होने के बाद खरीफ फसल बुवाई 2026 ने रफ्तार पकड़ ली है। जून में कमजोर और असमान बारिश के कारण धान, सोयाबीन, मक्का, कपास और दलहन जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई प्रभावित हुई थी। जुलाई में बारिश की स्थिति सुधरने से किसानों ने खेतों की तैयारी, धान की रोपाई और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई तेज कर दी है।
हालांकि बुवाई में सुधार आया है, लेकिन कुल खरीफ रकबा अभी भी पिछले वर्ष से कम बना हुआ है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 24 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 787.37 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 826.19 लाख हेक्टेयर था। यानी खरीफ फसलों का कुल रकबा अभी लगभग 38.82 लाख हेक्टेयर कम है।
खरीफ फसल बुवाई 2026 का ताजा आंकड़ा
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई की स्थिति इस प्रकार है:
| फसल | 2026 में बुवाई | 2025 में बुवाई | अंतर |
|---|---|---|---|
| धान | 234.43 लाख हेक्टेयर | 240.62 लाख हेक्टेयर | 6.19 लाख हेक्टेयर कम |
| मक्का | 77.79 लाख हेक्टेयर | 86.15 लाख हेक्टेयर | 8.36 लाख हेक्टेयर कम |
| सोयाबीन | 113.65 लाख हेक्टेयर | 117.24 लाख हेक्टेयर | 3.59 लाख हेक्टेयर कम |
| कपास | 98.72 लाख हेक्टेयर | 102.71 लाख हेक्टेयर | 3.99 लाख हेक्टेयर कम |
| कुल खरीफ फसलें | 787.37 लाख हेक्टेयर | 826.19 लाख हेक्टेयर | 38.82 लाख हेक्टेयर कम |
ये आंकड़े 24 जुलाई 2026 तक के हैं और कृषि मंत्रालय ने इन्हें 27 जुलाई 2026 को जारी किया है।
बारिश लौटने से बुवाई ने पकड़ी रफ्तार
जून के अंत में देश में मानसूनी बारिश की कमी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई थी। जुलाई में बारिश सुधरने के बाद यह कमी घटकर लगभग 16 प्रतिशत रह गई। इसका सीधा असर खेतों पर दिखाई दिया और किसानों ने रुकी हुई बुवाई तथा धान की रोपाई दोबारा शुरू कर दी।
बारिश में सुधार का सबसे अधिक फायदा उन क्षेत्रों को हुआ है जहां धान की रोपाई, सोयाबीन और कपास की बुवाई नमी की कमी के कारण रुकी हुई थी। इसके बावजूद कुछ पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में बारिश का वितरण अभी भी असमान है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर बुवाई बढ़ी है, लेकिन पिछले साल के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है।
धान का रकबा 234.43 लाख हेक्टेयर पहुंचा
खरीफ फसल बुवाई 2026 में धान सबसे अधिक रकबे वाली फसल बनी हुई है। 24 जुलाई तक देश में धान की बुवाई और रोपाई 234.43 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले वर्ष इसी समय तक धान का रकबा 240.62 लाख हेक्टेयर था।
इस तरह धान की बुवाई में लगभग 6.19 लाख हेक्टेयर यानी 2.6 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
धान की रोपाई के लिए खेत में पर्याप्त पानी और लगातार नमी जरूरी होती है। पूर्वी भारत, मध्य भारत और धान उत्पादक राज्यों में जुलाई की बारिश जारी रही तो आने वाले दिनों में धान का रकबा और बढ़ सकता है।
जिन किसानों ने धान की रोपाई अभी तक नहीं की है, उन्हें अपने क्षेत्र की बारिश, सिंचाई की उपलब्धता और कृषि विभाग की सलाह को देखते हुए कम अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन करना चाहिए।
मक्का की बुवाई में सबसे बड़ा अंतर
मक्का के रकबे में प्रमुख फसलों के मुकाबले अधिक गिरावट दिखाई दी है। इस वर्ष 24 जुलाई तक मक्का की बुवाई 77.79 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 86.15 लाख हेक्टेयर थी।
इसका मतलब मक्का का रकबा पिछले साल से 8.36 लाख हेक्टेयर या करीब 9.7 प्रतिशत कम है।
मक्का की बुवाई में कमी के पीछे शुरुआती मानसूनी बारिश में देरी, खेतों में पर्याप्त नमी का अभाव और कुछ क्षेत्रों में फसल चक्र में बदलाव जैसे कारण हो सकते हैं। आने वाले समय में मक्का का कम रकबा बाजार की उपलब्धता और भाव को प्रभावित कर सकता है, लेकिन उत्पादन का सही अनुमान फसल की बढ़वार और कटाई के करीब ही सामने आएगा।
सोयाबीन का रकबा 113.65 लाख हेक्टेयर
सोयाबीन की बुवाई 113.65 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि में सोयाबीन का रकबा 117.24 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार सोयाबीन की बुवाई लगभग 3.59 लाख हेक्टेयर या 3.1 प्रतिशत कम है।
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में मानसून की स्थिति फसल के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगी। सोयाबीन को शुरुआती अवस्था में पर्याप्त नमी की जरूरत होती है, लेकिन खेतों में लंबे समय तक जलभराव भी नुकसान पहुंचा सकता है।
किसानों को खेत में जल निकासी की व्यवस्था बनाए रखनी चाहिए और तना मक्खी, गर्डल बीटल तथा पत्ती खाने वाले कीटों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। किसी भी कीटनाशक का प्रयोग स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करें।
कपास की बुवाई 98.72 लाख हेक्टेयर
देश में कपास की बुवाई 24 जुलाई तक 98.72 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक कपास का क्षेत्र 102.71 लाख हेक्टेयर था।
इस वर्ष कपास का रकबा करीब 3.99 लाख हेक्टेयर या 3.9 प्रतिशत कम है।
कपास की खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में की जाती है। बारिश में देरी या लंबे सूखे अंतराल के कारण कपास के पौधों की शुरुआती बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
कपास किसानों को खेत में जल निकासी, खरपतवार नियंत्रण और रस चूसने वाले कीटों की निगरानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गुलाबी सुंडी से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने और कृषि विभाग की क्षेत्रीय सलाह का पालन करना उपयोगी हो सकता है।
दलहन की बुवाई भी पिछले साल से कम
धान, मक्का, सोयाबीन और कपास के साथ खरीफ दलहन का रकबा भी चिंता का विषय बना हुआ है। 24 जुलाई तक दलहन की बुवाई 84.57 लाख हेक्टेयर में हुई, जबकि पिछले साल इसी समय यह 91.46 लाख हेक्टेयर थी।
इस प्रकार दलहन के कुल रकबे में 6.90 लाख हेक्टेयर से अधिक की कमी दर्ज की गई है। अरहर और मूंग का क्षेत्र पिछले वर्ष से कम है, जबकि उड़द की बुवाई में मामूली बढ़ोतरी हुई है।
दलहन का रकबा कम रहने पर उत्पादन और बाजार आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम स्थिति बारिश, फसल की उत्पादकता, कीट-रोग और कटाई तक के मौसम पर निर्भर करेगी।
क्या खरीफ बुवाई पिछले साल के स्तर तक पहुंच पाएगी?
इस समय खरीफ फसल बुवाई 2026 पिछले साल से करीब 4.7 प्रतिशत पीछे है। लेकिन जुलाई में बारिश सुधरने के बाद बुवाई की रफ्तार बढ़ी है। धान और कुछ कम अवधि वाली फसलों की बुवाई कई क्षेत्रों में अभी आगे बढ़ सकती है।
आने वाले दिनों में तीन बातें सबसे महत्वपूर्ण रहेंगी:
1. बारिश का वितरण
देश में कुल बारिश सामान्य के करीब होना ही पर्याप्त नहीं है। फसल उत्पादन के लिए जरूरी है कि बारिश सही समय पर और सभी कृषि क्षेत्रों में संतुलित रूप से हो।
2. लंबे सूखे अंतराल से बचाव
बुवाई के बाद लगातार कई दिनों तक बारिश नहीं होने से बीज अंकुरण, पौधों की बढ़वार और दोबारा बुवाई का खर्च बढ़ सकता है।
3. अधिक बारिश और जलभराव
धान को अधिक पानी की जरूरत होती है, लेकिन सोयाबीन, कपास, मक्का और दलहन के खेतों में लंबे समय तक जलभराव फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
खरीफ किसानों को अभी क्या करना चाहिए?
मौसम में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसानों को निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- खेत में बारिश के पानी के निकास की व्यवस्था रखें।
- दोबारा बुवाई की जरूरत पड़ने पर प्रमाणित और कम अवधि वाली किस्मों का चयन करें।
- बीजोपचार के बाद ही बुवाई करें।
- खरपतवार को शुरुआती अवस्था में नियंत्रित करें।
- फसल में कीट और रोग की नियमित निगरानी करें।
- अपने जिले की मौसम आधारित कृषि सलाह देखते रहें।
- खाद और कीटनाशक का उपयोग केवल अनुशंसित मात्रा में करें।
- फसल बीमा कराने वाले किसान नुकसान की स्थिति में समय पर सूचना दें।
बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?
मक्का, दलहन, सोयाबीन और कपास का रकबा पिछले वर्ष से कम रहने के कारण बाजार में उत्पादन को लेकर शुरुआती चिंता दिखाई दे सकती है। लेकिन केवल बुवाई क्षेत्र के आधार पर भाव या उत्पादन का अंतिम अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी।
फसल का वास्तविक उत्पादन मानसून के आगे के प्रदर्शन, प्रति हेक्टेयर उत्पादकता, कीट-रोग, सिंचाई और कटाई के समय मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।
किसानों को केवल संभावित तेजी की खबरों के आधार पर पूरा उत्पादन रोककर नहीं रखना चाहिए। स्थानीय मंडी भाव, फसल की गुणवत्ता, भंडारण लागत और घरेलू जरूरत को ध्यान में रखकर बिक्री का निर्णय लेना बेहतर होगा।
निष्कर्ष
बारिश में सुधार के बाद खरीफ फसल बुवाई 2026 में तेजी जरूर आई है, लेकिन देश का कुल खरीफ रकबा अभी पिछले वर्ष से कम है। धान का क्षेत्र 234.43 लाख हेक्टेयर, सोयाबीन का 113.65 लाख हेक्टेयर, कपास का 98.72 लाख हेक्टेयर और मक्का का रकबा 77.79 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है।
आने वाले दो से तीन सप्ताह खरीफ फसलों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे। अगर बारिश का वितरण संतुलित रहा और लंबे सूखे अंतराल नहीं आए, तो बुवाई का अंतर कुछ हद तक कम हो सकता है। किसानों को अपने क्षेत्र के मौसम और कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही फसल प्रबंधन करना चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
खरीफ फसल बुवाई 2026 कितने क्षेत्र में हुई है?
24 जुलाई 2026 तक देश में कुल खरीफ फसलों की बुवाई 787.37 लाख हेक्टेयर में हुई है। पिछले वर्ष इसी समय यह 826.19 लाख हेक्टेयर थी।
2026 में धान की बुवाई कितनी हुई है?
24 जुलाई तक धान की बुवाई और रोपाई 234.43 लाख हेक्टेयर में हुई है। यह पिछले वर्ष से 6.19 लाख हेक्टेयर कम है।
सोयाबीन की बुवाई पिछले साल से कितनी कम है?
सोयाबीन का रकबा 113.65 लाख हेक्टेयर है, जो पिछले वर्ष के 117.24 लाख हेक्टेयर से 3.59 लाख हेक्टेयर कम है।
मक्का का रकबा कितना है?
24 जुलाई 2026 तक मक्का की बुवाई 77.79 लाख हेक्टेयर में हुई है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9.7 प्रतिशत कम है।
कपास की बुवाई कितने क्षेत्र में हुई है?
कपास की बुवाई 98.72 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष से 3.99 लाख हेक्टेयर कम है।
SEO Details
Focus Keyword: खरीफ फसल बुवाई 2026
SEO Title: खरीफ फसल बुवाई 2026: धान, सोयाबीन, मक्का और कपास का ताजा रकबा
Meta Description: बारिश लौटने के बाद खरीफ फसल बुवाई 2026 में तेजी आई है। जानें धान, सोयाबीन, मक्का और कपास का ताजा रकबा तथा पिछले साल से कितना अंतर है।
URL Slug: kharif-fasal-buwai-2026-dhan-soyabean-makka-kapas-rakba
Secondary Keywords:
खरीफ फसल का रकबा 2026, धान की बुवाई 2026, सोयाबीन बुवाई क्षेत्र, मक्का की बुवाई, कपास का रकबा, खरीफ बुवाई ताजा आंकड़े, मानसून और खरीफ फसल
Suggested Image Alt Text: बारिश के बाद खेत में खरीफ फसल की बुवाई करते किसान
Suggested Excerpt: जुलाई में मानसूनी बारिश सुधरने के बाद खरीफ फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ी है। जानिए 24 जुलाई 2026 तक धान, मक्का, सोयाबीन और कपास के रकबे का ताजा सरकारी आंकड़ा।


