प्रगति मिशन 2026 लॉन्च: 20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ, 20 हजार युवा बनेंगे कृषि-उद्यमी

गांवों में मिलेंगी आधुनिक कृषि सेवाएं, किसानों को तकनीक, मशीनरी और बाजार से जोड़ेंगे प्रशिक्षित युवा
भारत में खेती को आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई राष्ट्रीय पहल की शुरुआत की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 जुलाई 2026 को ‘प्रगति’ यानी PRAGATI प्रोजेक्ट लॉन्च किया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य देश के 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाना और उनके माध्यम से 20 लाख से अधिक छोटे एवं सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि सेवाएं पहुंचाना है। सरकार को उम्मीद है कि इससे खेती की लागत घटाने, फसल उत्पादकता बढ़ाने, किसानों को बाजार से जोड़ने और गांवों में रोजगार के नए अवसर तैयार करने में मदद मिलेगी।
प्रगति मिशन 2026 की प्रमुख बातें
| विवरण | निर्धारित लक्ष्य |
|---|---|
| तैयार किए जाने वाले कृषि-उद्यमी | 20,000 |
| लाभान्वित होने वाले किसान | 20 लाख से अधिक |
| किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य | कम से कम 30% |
| प्रमुख फसलों की उपज बढ़ाने का लक्ष्य | 15 से 20% |
| पुनर्योजी खेती से जोड़े जाने वाले किसान | कम से कम 20% |
| प्रारंभिक प्रमुख राज्य | 8 राज्य |
| पहले से सक्रिय कृषि-उद्यमी नेटवर्क | 26,000 से अधिक |
प्रगति मिशन क्या है?
प्रगति मिशन एक बहु-साझेदार राष्ट्रीय कृषि पहल है। इसके अंतर्गत ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षित करके गांव स्तर पर कृषि-उद्यमी तैयार किए जाएंगे। ये कृषि-उद्यमी किसानों और आधुनिक कृषि सेवाओं के बीच संपर्क का काम करेंगे।
किसान अपने आसपास ही मिट्टी जांच, वैज्ञानिक खेती की सलाह, कृषि मशीनरी, वित्तीय सेवाओं, बाजार संपर्क और डिजिटल कृषि तकनीकों से संबंधित सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इससे विशेष रूप से उन छोटे किसानों को फायदा मिलने की उम्मीद है, जिनकी सरकारी एवं निजी कृषि सेवाओं तक सीधी पहुंच सीमित रहती है।
कृषि-उद्यमी कौन होंगे?
प्रगति मिशन के अंतर्गत गांवों के शिक्षित युवाओं और महिलाओं को प्रशिक्षण देकर कृषि-उद्यमी बनाया जाएगा। ये युवा केवल किसानों को सलाह देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि कृषि से जुड़ी सेवाओं को स्थानीय व्यवसाय के रूप में भी संचालित कर सकेंगे।
एक कृषि-उद्यमी अपने क्षेत्र के किसानों को निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध करा सकता है:
- मिट्टी और मृदा स्वास्थ्य से संबंधित सेवाएं
- फसल चयन और खेती की वैज्ञानिक सलाह
- कृषि मशीनरी और मशीनीकरण की सुविधा
- बैंक ऋण एवं औपचारिक वित्तीय सेवाओं से जुड़ने में सहायता
- डिजिटल कृषि सलाह और तकनीकी जानकारी
- फसल बेचने के लिए बाजार संपर्क
- बागवानी, पशुपालन और अन्य अतिरिक्त आय गतिविधियों की जानकारी
इस मॉडल से गांवों में स्वरोजगार बढ़ने के साथ किसानों को समय पर स्थानीय सहायता मिलने की संभावना है।
किन राज्यों में लागू होगा प्रगति मिशन?
पहले चरण में प्रगति मिशन को देश के आठ प्रमुख कृषि राज्यों में लागू किया जाएगा:
- मध्य प्रदेश
- उत्तर प्रदेश
- बिहार
- महाराष्ट्र
- राजस्थान
- पश्चिम बंगाल
- असम
- झारखंड
इन राज्यों में छोटे और सीमांत किसानों की संख्या अधिक है। यहां कृषि-उद्यमियों के माध्यम से खेती की सलाह, मिट्टी परीक्षण, मशीनरी सेवाएं, वित्तीय संपर्क और बाजार तक पहुंच जैसी सुविधाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराने की योजना है।
किसानों को प्रगति मिशन से क्या लाभ मिलेगा?
1. गांव में ही मिलेगी खेती की सलाह
कई किसानों को नई किस्मों, कीट नियंत्रण, उर्वरक प्रबंधन और फसल रोगों की सही जानकारी समय पर नहीं मिल पाती। प्रशिक्षित कृषि-उद्यमी स्थानीय परिस्थितियों को समझते हुए किसानों तक वैज्ञानिक खेती की जानकारी पहुंचाएंगे।
2. मिट्टी परीक्षण की सुविधा
मिट्टी की जांच किए बिना उर्वरकों का अत्यधिक या गलत प्रयोग करने से खेती की लागत बढ़ सकती है। मिशन के माध्यम से किसानों को मृदा स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
मिट्टी परीक्षण से किसान यह समझ सकेंगे कि उनके खेत में किन पोषक तत्वों की कमी है और किस फसल के लिए कितनी मात्रा में खाद डालनी चाहिए।
3. कृषि मशीनरी तक आसान पहुंच
छोटे किसानों के लिए ट्रैक्टर, रीपर, सीड ड्रिल, पावर टिलर या अन्य मशीनें खरीदना आसान नहीं होता। स्थानीय कृषि-उद्यमियों के माध्यम से किसान जरूरत के अनुसार मशीनरी सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं।
इससे किसानों को प्रत्येक मशीन खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी और खेती का काम कम समय में पूरा किया जा सकेगा।
4. बैंक और वित्तीय संस्थानों से जुड़ाव
प्रगति मिशन में किसानों की वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और उन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि-उद्यमी किसानों को बैंक खाते, कृषि ऋण, वित्तीय उत्पादों और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं को समझने में सहायता कर सकते हैं।
5. बाजार तक बेहतर पहुंच
खेती में अच्छी पैदावार होने के बाद भी सही बाजार नहीं मिलने से किसानों को कम कीमत पर फसल बेचनी पड़ती है। प्रगति मिशन किसानों को स्थानीय मंडियों, खरीदारों, प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य बाजार विकल्पों से जोड़ने पर काम करेगा।
6. खेती के अलावा अतिरिक्त आय
किसानों को केवल एक या दो पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहने के बजाय आय के दूसरे साधनों से भी जोड़ा जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- बागवानी
- पशुपालन
- डेयरी व्यवसाय
- मत्स्य पालन
- मधुमक्खी पालन
- फसल प्रसंस्करण
- कृषि उत्पादों की पैकेजिंग
- वैल्यू एडिशन
इन गतिविधियों से किसान खेती के साथ नियमित अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं।
ड्रोन और डिजिटल तकनीक का होगा उपयोग
प्रगति मिशन में ड्रोन, डिजिटल कृषि सलाह, वैज्ञानिक खेती, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया जाएगा।
ड्रोन तकनीक का उपयोग फसल निगरानी, दवा छिड़काव और खेत की स्थिति का आकलन करने में किया जा सकता है। वहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों तक मौसम, बाजार भाव, फसल रोग और कृषि सलाह तेजी से पहुंचाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, किसानों को कौन-सी डिजिटल या ड्रोन सेवा किस कीमत पर मिलेगी, इसकी विस्तृत संचालन व्यवस्था संबंधित क्षेत्रों में कार्यक्रम लागू होने के बाद स्पष्ट होगी।
किसानों की आय में 30 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य
प्रगति मिशन के माध्यम से किसानों की आय में कम से कम 30 प्रतिशत बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उपज में 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
सरकार और सहयोगी संस्थाएं बेहतर बीज, वैज्ञानिक सलाह, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, खेती की लागत में कमी, बाजार संपर्क और आधुनिक तकनीकों के माध्यम से इन लक्ष्यों को प्राप्त करने का प्रयास करेंगी।
ध्यान रखना जरूरी है कि ये कार्यक्रम के निर्धारित लक्ष्य हैं। किसी किसान की वास्तविक आय या उत्पादन में बढ़ोतरी उसकी फसल, भूमि, मौसम, सिंचाई, बाजार मूल्य और अपनाई गई कृषि पद्धतियों पर निर्भर करेगी।
पुनर्योजी खेती को मिलेगा बढ़ावा
मिशन में शामिल किसानों में से कम से कम 20 प्रतिशत किसानों को पुनर्योजी कृषि पद्धतियां अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
पुनर्योजी कृषि का उद्देश्य मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना, जैव विविधता बचाना, पानी का बेहतर प्रबंधन करना और खेती को जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सक्षम बनाना है।
इसके अंतर्गत क्षेत्र और फसल के अनुसार निम्न गतिविधियां अपनाई जा सकती हैं:
- फसल चक्र
- जैविक पदार्थों का उपयोग
- खेत में फसल अवशेषों का बेहतर प्रबंधन
- मिट्टी में नमी का संरक्षण
- रासायनिक आदानों का संतुलित उपयोग
- मिश्रित एवं एकीकृत खेती
- प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
महिला कृषि-उद्यमियों को मिलेगा अवसर
प्रगति मिशन में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है। बड़ी संख्या में कृषि सखी और महिला कृषि-उद्यमियों को कार्यक्रम से जोड़ने की योजना है।
प्रशिक्षित महिला कृषि-उद्यमी गांव की अन्य महिला किसानों तक आधुनिक खेती, पोषण आधारित कृषि, पशुपालन, वित्तीय सेवाओं और डिजिटल तकनीकों की जानकारी पहुंचा सकती हैं। इससे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक भागीदारी और स्वरोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।
किन संस्थाओं का मिलेगा सहयोग?
प्रगति मिशन को सरकार, निजी संस्थाओं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय संगठनों के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इस बहु-साझेदार पहल में प्रमुख रूप से निम्न संस्थाएं शामिल हैं:
- पेप्सिको फाउंडेशन
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया फाउंडेशन
- गेट्स फाउंडेशन
- IDH
- Heifer International
- Environmental Defense Fund
- Global Agri Entrepreneurship Academy
- SAFIA
- Agri Entrepreneur Growth Foundation
- Transform Rural India Foundation
ये संस्थाएं प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, वित्तीय समावेशन, डिजिटल सेवाओं, बाजार संपर्क और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने में सहयोग करेंगी।
पहले से मौजूद नेटवर्क का होगा विस्तार
प्रगति मिशन को कृषि-उद्यमिता के पहले से चल रहे अनुभवों के आधार पर तैयार किया गया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार वर्तमान में 26 हजार से अधिक कृषि-उद्यमियों का नेटवर्क मौजूद है।
अब इस नेटवर्क में 20 हजार नए कृषि-उद्यमियों को जोड़ने का लक्ष्य है। व्यापक कार्यक्रम विवरण के अनुसार मौजूदा नेटवर्क लगभग 26 लाख किसानों तक सेवाएं पहुंचा रहा है और नई पहल के माध्यम से 20 लाख से अधिक अतिरिक्त किसानों तक पहुंच बनाने की योजना है।
प्रगति मिशन में आवेदन कैसे करें?
प्रगति मिशन के लॉन्च की आधिकारिक सूचना में फिलहाल निम्न जानकारियां विस्तार से घोषित नहीं की गई हैं:
- कृषि-उद्यमी बनने की पात्रता
- आयु सीमा
- न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता
- आवेदन की प्रारंभिक एवं अंतिम तारीख
- ऑनलाइन आवेदन पोर्टल
- प्रशिक्षण की अवधि
- प्रशिक्षण शुल्क या आर्थिक सहायता
- जिलेवार चयन प्रक्रिया
इसलिए किसी अनधिकृत वेबसाइट, सोशल मीडिया लिंक या एजेंट को दस्तावेज अथवा पैसे देने से बचें। आवेदन प्रक्रिया शुरू होने पर कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, राज्य कृषि विभाग या संबंधित आधिकारिक संस्थाओं की सूचना ही मान्य मानी जानी चाहिए। आधिकारिक लॉन्च विज्ञप्ति में फिलहाल कार्यक्रम के उद्देश्य, राज्य और लक्ष्य बताए गए हैं, लेकिन आवेदन पोर्टल की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
किसानों के लिए अभी क्या करना जरूरी है?
प्रगति मिशन आपके जिले में शुरू होने पर इसका लाभ लेने के लिए किसान अपने जरूरी रिकॉर्ड पहले से व्यवस्थित रख सकते हैं:
- आधार कार्ड
- सक्रिय मोबाइल नंबर
- बैंक खाते का विवरण
- भूमि या खेती से संबंधित रिकॉर्ड
- फसल और खेत का विवरण
- किसान पंजीकरण संख्या, जहां लागू हो
- मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड, उपलब्ध होने पर
ये सामान्य कृषि सेवाओं में उपयोग होने वाले दस्तावेज हैं। प्रगति मिशन की अंतिम दस्तावेज सूची आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
प्रगति मिशन कितना महत्वपूर्ण है?
भारत में कृषि सेवाओं की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है नई तकनीक और वैज्ञानिक जानकारी को गांव के अंतिम किसान तक पहुंचाना। कई सरकारी योजनाएं और तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद किसान जानकारी, प्रशिक्षण, मशीनरी, बैंकिंग और बाजार संपर्क की कमी के कारण उनका पूरा लाभ नहीं उठा पाते।
प्रगति मिशन गांव स्तर पर कृषि-उद्यमियों का नेटवर्क तैयार करके इसी अंतर को कम करने का प्रयास करता है। कार्यक्रम का प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कृषि-उद्यमियों को कितना व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलता है, किसानों को सेवाएं उचित लागत पर उपलब्ध होती हैं या नहीं और कार्यक्रम की निगरानी कितनी प्रभावी रहती है।
निष्कर्ष
प्रगति मिशन 2026 ग्रामीण युवाओं, महिला उद्यमियों और छोटे किसानों को एक साथ जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कृषि पहल है। इसके माध्यम से 20 हजार युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाकर 20 लाख से अधिक किसानों तक आधुनिक खेती, मिट्टी जांच, कृषि मशीनरी, डिजिटल सलाह, वित्तीय सेवाएं और बाजार संपर्क पहुंचाने का लक्ष्य है।
यदि यह कार्यक्रम गांव स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू होता है, तो इससे किसानों की खेती की लागत कम करने, फसल उत्पादकता बढ़ाने, अतिरिक्त आय के अवसर विकसित करने और ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार तैयार करने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल किसानों और युवाओं को आवेदन तथा चयन प्रक्रिया की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना चाहिए और किसी भी अनधिकृत लिंक या शुल्क से सावधान रहना चाहिए।
प्रगति मिशन से संबंधित प्रश्न और उत्तर
प्रश्न 1. प्रगति मिशन क्या है?
प्रगति मिशन एक राष्ट्रीय कृषि पहल है, जिसके तहत 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाकर 20 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि सेवाएं पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रश्न 2. प्रगति मिशन कब लॉन्च किया गया?
प्रगति प्रोजेक्ट को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 7 जुलाई 2026 को लॉन्च किया।
प्रश्न 3. कितने युवा कृषि-उद्यमी बनेंगे?
मिशन के अंतर्गत 20 हजार नए कृषि-उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रश्न 4. कितने किसानों को लाभ मिलेगा?
प्रगति मिशन से देशभर के 20 लाख से अधिक छोटे और सीमांत किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है।
प्रश्न 5. किन राज्यों में प्रगति मिशन लागू होगा?
प्रारंभिक चरण में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड में इसे लागू किया जाएगा।
प्रश्न 6. किसानों को कौन-कौन सी सेवाएं मिलेंगी?
किसानों को खेती की सलाह, मिट्टी परीक्षण, मशीनरी सेवाएं, बैंकिंग और वित्तीय संपर्क, डिजिटल तकनीक, बाजार संपर्क और वैकल्पिक आय गतिविधियों से जुड़ी सहायता मिल सकती है।
प्रश्न 7. किसानों की आय कितनी बढ़ाने का लक्ष्य है?
कार्यक्रम में शामिल किसानों की आय में कम से कम 30 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है।
प्रश्न 8. किन फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य है?
धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादकता में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का लक्ष्य है।
प्रश्न 9. क्या प्रगति मिशन के आवेदन शुरू हो गए हैं?
आधिकारिक लॉन्च सूचना में अभी आवेदन पोर्टल, अंतिम तिथि और पात्रता की विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। किसानों और युवाओं को आधिकारिक अधिसूचना की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
प्रश्न 10. कृषि-उद्यमी बनने के लिए आवेदन कहां होगा?
आवेदन का आधिकारिक माध्यम अभी घोषित नहीं किया गया है। घोषणा होने पर जानकारी कृषि मंत्रालय, संबंधित राज्य कृषि विभाग या कार्यक्रम की सहयोगी संस्थाओं के आधिकारिक माध्यम से जारी की जा सकती है।
eKhetiBari की सलाह
किसान भाइयों और ग्रामीण युवाओं को सलाह है कि प्रगति मिशन से जुड़ी आवेदन प्रक्रिया, प्रशिक्षण और जिलेवार चयन की जानकारी के लिए केवल आधिकारिक सरकारी सूचना पर भरोसा करें। किसी अनजान लिंक पर अपना आधार नंबर, बैंक विवरण या OTP साझा न करें।
कृषि योजनाओं, ट्रैक्टर, कृषि मशीनरी, फसल सलाह, मंडी भाव और सरकारी अपडेट से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी के लिए eKhetiBari के साथ जुड़े रहें।
स्रोत: भारत सरकार, पत्र सूचना कार्यालय एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 7 जुलाई 2026 की आधिकारिक विज्ञप्ति।
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