प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव: नई तकनीक से होगा नुकसान का आकलन, किसानों को जल्द मिलेगा क्लेम

प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश के कारण फसल खराब होने पर किसानों को सबसे अधिक चिंता बीमा क्लेम मिलने की होती है। कई बार नुकसान का सर्वे पूरा होने, उपज का आकलन करने और बीमा राशि जारी होने में समय लग जाता है। अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 को ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही है।
इसके तहत फसल नुकसान और उपज का आकलन करने के लिए YES-TECH, मौसम की स्थानीय जानकारी के लिए WINDS, डिजिटल भुगतान के लिए DigiClaim Module और खेत स्तर पर नुकसान दर्ज करने के लिए CLAP App जैसी तकनीकों को योजना से जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करना, विवाद कम करना और पात्र किसानों तक बीमा राशि समय पर पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में क्या बदलाव हुआ है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के अंतर्गत पहले फसल उत्पादन और नुकसान का आकलन मुख्य रूप से फसल कटाई प्रयोग एवं स्थानीय सर्वे के आधार पर किया जाता था। अब इन प्रक्रियाओं के साथ रिमोट सेंसिंग, मौसम केंद्र, डिजिटल मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों का भी उपयोग किया जा रहा है।
सरकार द्वारा योजना में मुख्य रूप से निम्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है:
- YES-TECH से रिमोट सेंसिंग आधारित उपज का आकलन
- WINDS से ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर का मौसम डेटा
- NCIP से किसानों का पंजीकरण और क्लेम रिकॉर्ड
- DigiClaim से बीमा राशि का डिजिटल भुगतान
- CLAP App से खेत स्तर पर फसल नुकसान का रिकॉर्ड
- CCE Agri App से फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े अपलोड करना
इन तकनीकों से फसल नुकसान का आकलन ज्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
YES-TECH से होगा फसल की उपज का वैज्ञानिक आकलन
YES-TECH का पूरा नाम Yield Estimation System Based on Technology है। इस प्रणाली में रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों के माध्यम से फसल की संभावित उपज का आकलन किया जाता है।
YES-TECH को खरीफ 2023 से धान और गेहूं के लिए लागू किया गया था। इसके बाद खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। उपज आकलन में YES-TECH से प्राप्त आंकड़ों को कम से कम 30 प्रतिशत वेटेज देना निर्धारित किया गया है।
YES-TECH से किसानों को क्या फायदा होगा?
इस तकनीक से उपज और फसल नुकसान का आकलन केवल मैनुअल सर्वे पर निर्भर नहीं रहेगा। सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल होने से:
- फसल उत्पादन का अधिक वैज्ञानिक अनुमान तैयार होगा।
- नुकसान के आकलन में मानवीय गलती कम हो सकती है।
- राज्य सरकार और बीमा कंपनी के बीच आंकड़ों से जुड़े विवाद घट सकते हैं।
- क्लेम की गणना अधिक पारदर्शी हो सकती है।
- किसानों को बीमा राशि मिलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में YES-TECH को 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। मध्य प्रदेश ने तकनीक आधारित उपज को 100 प्रतिशत वेटेज दिया, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत तथा ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत वेटेज दिया।
WINDS से गांव स्तर तक मिलेगा मौसम का सटीक डेटा
WINDS का पूरा नाम Weather Information Network and Data System है। इसका उद्देश्य देशभर में स्वचालित मौसम केंद्र यानी AWS और स्वचालित वर्षामापी यानी ARG का नेटवर्क तैयार करना है।
इस नेटवर्क से लंबे समय का हाइपरलोकल मौसम डेटा एकत्र किया जाएगा। यह जानकारी फसल बीमा के साथ-साथ कृषि सलाह, मौसम पूर्वानुमान और आपदा जोखिम प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकती है।
WINDS के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर Automatic Weather Stations और ग्राम पंचायत स्तर पर Automatic Rain Gauges स्थापित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य मौजूदा नेटवर्क की तुलना में मौसम उपकरणों का घनत्व लगभग पांच गुना बढ़ाना है।
सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में WINDS लागू
सरकार के अनुसार WINDS को असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनाया गया है।
इन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में:
- 16,843 स्थानों पर उपकरण लगाने की मंजूरी दी गई है।
- 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा किया गया है।
- 892 AWS और ARG उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं।
स्थानीय मौसम का बेहतर रिकॉर्ड उपलब्ध होने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी क्षेत्र में कितनी बारिश हुई, सूखे की स्थिति कितनी गंभीर थी या किसी मौसम घटना से फसल को कितना नुकसान पहुंचा।
NCIP पोर्टल से डिजिटल हुई फसल बीमा प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने National Crop Insurance Portal यानी NCIP को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित जानकारी का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है।
इस पोर्टल के माध्यम से:
- किसान ऑनलाइन फसल बीमा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।
- बीमित किसान और फसल का विवरण दर्ज किया जाता है।
- प्रीमियम एवं सरकारी सब्सिडी का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- फसल नुकसान और क्लेम की जानकारी साझा की जाती है।
- स्वीकृत क्लेम राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
एक ही पोर्टल पर जानकारी उपलब्ध होने से सरकार, बीमा कंपनियों, बैंकों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलती है।
DigiClaim Module से सीधे बैंक खाते में आएगा क्लेम
फसल बीमा दावों के भुगतान की निगरानी के लिए सरकार ने DigiClaim Module को शुरू किया है। यह मॉड्यूल खरीफ 2022 से क्लेम भुगतान के लिए संचालित किया जा रहा है।
DigiClaim में National Crop Insurance Portal को Public Finance Management System और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे स्वीकृत बीमा दावा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेजा जा सकता है।
इस डिजिटल व्यवस्था से:
- भुगतान की स्थिति की निगरानी बेहतर होती है।
- मैनुअल प्रक्रिया कम होती है।
- गलत खाते में भुगतान या भुगतान वापस होने की समस्या घट सकती है।
- क्लेम प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बन सकती है।
- पात्र किसान तक राशि सीधे पहुंच सकती है।
क्लेम में देरी पर बीमा कंपनी पर लगेगी 12 प्रतिशत पेनल्टी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत समय पर क्लेम भुगतान नहीं होने पर बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान लागू किया गया है। खरीफ 2024 से बीमा कंपनी द्वारा भुगतान में देरी होने पर इस पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से स्वतः की जाती है।
इसके अलावा खरीफ 2025 से राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी होने पर भी 12 प्रतिशत पेनल्टी लगाई जाती है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व में कई दावे राज्य सरकार के हिस्से की सब्सिडी में देरी या बीमा कंपनी द्वारा भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण लंबित हो जाते थे।
राज्य सरकारों के लिए एस्क्रो खाता अनिवार्य
राज्यों द्वारा प्रीमियम का हिस्सा समय पर जमा कराने के लिए खरीफ 2025 से एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारों को योजना के प्रावधानों के अनुसार अपना प्रीमियम हिस्सा अग्रिम रूप से इस खाते में जमा करना होता है।
सरकार ने केंद्र के प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्य के हिस्से से अलग करने की व्यवस्था भी लागू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हिस्से में देरी होने के बावजूद किसान को केंद्र सरकार के हिस्से से संबंधित आनुपातिक क्लेम मिल सके।
CLAP App से खेत स्तर पर दर्ज होगा फसल नुकसान
फसल नुकसान के डिजिटल आकलन के लिए Crop Loss Assessment App यानी CLAP विकसित किया गया है। यह मोबाइल ऐप विशेष रूप से स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए बनाया गया है।
CLAP App के माध्यम से:
- व्यक्तिगत खेत का निरीक्षण दर्ज किया जा सकता है।
- प्रभावित जमीन और फसल का विवरण रिकॉर्ड किया जा सकता है।
- स्थानीय आपदा से हुए नुकसान का डिजिटल प्रमाण तैयार किया जा सकता है।
- फसल कटाई के बाद हुए नुकसान की जानकारी दर्ज की जा सकती है।
- बीमा कंपनी और संबंधित विभाग को नुकसान का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए CLAP App का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
CCE Agri App से कम होगी कागजी प्रक्रिया
फसल की वास्तविक उपज जानने के लिए सरकार द्वारा फसल कटाई प्रयोग यानी Crop Cutting Experiments कराए जाते हैं। अब इन प्रयोगों के आंकड़ों को CCE Agri App के माध्यम से एकत्र करके NCIP पर अपलोड किया जा रहा है।
डिजिटल डेटा संग्रह से रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध हो सकता है और आंकड़ों में होने वाली गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ राज्य के भूमि रिकॉर्ड को भी NCIP से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान, खेत और बीमित फसल की जानकारी का मिलान आसान हो सके।
किसानों को इन नई तकनीकों से क्या लाभ मिलेगा?
नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ फसल नुकसान के आकलन में पारदर्शिता बढ़ना है। पहले कई बार किसान के खेत में वास्तविक नुकसान और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर होने की शिकायत सामने आती थी। मौसम स्टेशन, रिमोट सेंसिंग और मोबाइल ऐप से प्राप्त आंकड़े इस अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
किसानों को संभावित रूप से ये लाभ मिलेंगे:
- फसल नुकसान का अधिक सटीक आकलन।
- क्लेम संबंधी विवादों में कमी।
- बीमा दावे की बेहतर डिजिटल निगरानी।
- पात्र किसान के बैंक खाते में सीधा भुगतान।
- स्थानीय मौसम और वर्षा का विश्वसनीय रिकॉर्ड।
- भुगतान में देरी करने वाली संस्था की जवाबदेही।
- कागजी प्रक्रिया और मैनुअल गलतियों में कमी।
हालांकि क्लेम मिलने का समय नुकसान की सूचना, सर्वे, दस्तावेज, राज्य सरकार की प्रक्रिया और संबंधित बीमा कंपनी द्वारा दावे की स्वीकृति पर भी निर्भर करेगा।
फसल खराब होने पर किसान क्या करें?
किसान को फसल नुकसान होने पर केवल सरकारी सर्वे का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्थानीय आपदा या फसल कटाई के बाद नुकसान होने की स्थिति में किसान को निर्धारित समय के भीतर अपनी बीमा कंपनी, बैंक, कृषि विभाग या आधिकारिक फसल बीमा माध्यम से सूचना देनी चाहिए।
नुकसान की सूचना देते समय किसान को ये चीजें सुरक्षित रखनी चाहिए:
- फसल बीमा पॉलिसी या आवेदन संख्या
- आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण
- खेत और खसरा संख्या की जानकारी
- क्षतिग्रस्त फसल की फोटो एवं वीडियो
- नुकसान होने की तारीख और कारण
- शिकायत या सूचना दर्ज कराने का प्रमाण
किसान अपने आवेदन और क्लेम की स्थिति आधिकारिक प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल तथा संबंधित बीमा कंपनी के माध्यम से जांच सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में YES-TECH, WINDS, DigiClaim, NCIP, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का उपयोग भारतीय फसल बीमा व्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रिमोट सेंसिंग से उपज का वैज्ञानिक आकलन, गांव स्तर का मौसम डेटा, खेत स्तर पर डिजिटल नुकसान रिकॉर्ड और सीधे बैंक खाते में क्लेम भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से किसानों को ज्यादा पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद है। हालांकि किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय पर फसल बीमा कराएं, पॉलिसी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और नुकसान होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तुरंत सूचना दर्ज कराएं।
ऐसी ही कृषि योजनाओं, खेती की तकनीक, मौसम, मंडी भाव और किसान समाचारों के लिए eKhetibari के साथ जुड़े रहें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की नई तकनीकों से जुड़े FAQs
प्रश्न 1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कौन-कौन सी नई तकनीक इस्तेमाल हो रही है?
योजना में YES-TECH, WINDS, National Crop Insurance Portal, DigiClaim Module, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रश्न 2. YES-TECH क्या है?
YES-TECH रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों की मदद से फसल की उपज का आकलन करने वाली प्रणाली है। इसका उद्देश्य उपज का निष्पक्ष और वैज्ञानिक अनुमान तैयार करना है।
प्रश्न 3. WINDS से किसानों को क्या फायदा होगा?
WINDS के माध्यम से ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक स्थानीय बारिश और मौसम का डेटा एकत्र किया जाएगा। यह डेटा फसल नुकसान के आकलन और कृषि परामर्श में मदद कर सकता है।
प्रश्न 4. DigiClaim Module कैसे काम करता है?
DigiClaim, NCIP को PFMS और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ता है। इसके माध्यम से स्वीकृत क्लेम किसान के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाता है।
प्रश्न 5. CLAP App का उपयोग किस लिए किया जाता है?
CLAP App से स्थानीय आपदा और फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का व्यक्तिगत खेत एवं जमीन के स्तर पर डिजिटल आकलन किया जाता है।
प्रश्न 6. बीमा कंपनी क्लेम देने में देरी करे तो क्या होगा?
खरीफ 2024 से समय पर क्लेम भुगतान नहीं करने वाली बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से की जाती है।
प्रश्न 7. क्या नई तकनीक लागू होने के बाद क्लेम तुरंत मिलेगा?
नई तकनीक का उद्देश्य आकलन और भुगतान प्रक्रिया को तेज तथा पारदर्शी बनाना है। वास्तविक भुगतान का समय नुकसान की सूचना, दस्तावेजों, सर्वे और क्लेम की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: योजना के नियम, अधिसूचित फसलें, अंतिम तारीख और आवेदन प्रक्रिया राज्य तथा फसल सीजन के अनुसार अलग हो सकती है। किसान आवेदन या क्लेम से पहले आधिकारिक PMFBY पोर्टल, कृषि विभाग या संबंधित बीमा कंपनी से नवीनतम जानकारी जरूर प्राप्त करें।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव: नई तकनीक से होगा नुकसान का आकलन, किसानों को जल्द मिलेगा क्लेम
प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश के कारण फसल खराब होने पर किसानों को सबसे अधिक चिंता बीमा क्लेम मिलने की होती है। कई बार नुकसान का सर्वे पूरा होने, उपज का आकलन करने और बीमा राशि जारी होने में समय लग जाता है। अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 को ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही है।
इसके तहत फसल नुकसान और उपज का आकलन करने के लिए YES-TECH, मौसम की स्थानीय जानकारी के लिए WINDS, डिजिटल भुगतान के लिए DigiClaim Module और खेत स्तर पर नुकसान दर्ज करने के लिए CLAP App जैसी तकनीकों को योजना से जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करना, विवाद कम करना और पात्र किसानों तक बीमा राशि समय पर पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में क्या बदलाव हुआ है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के अंतर्गत पहले फसल उत्पादन और नुकसान का आकलन मुख्य रूप से फसल कटाई प्रयोग एवं स्थानीय सर्वे के आधार पर किया जाता था। अब इन प्रक्रियाओं के साथ रिमोट सेंसिंग, मौसम केंद्र, डिजिटल मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों का भी उपयोग किया जा रहा है।
सरकार द्वारा योजना में मुख्य रूप से निम्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है:
- YES-TECH से रिमोट सेंसिंग आधारित उपज का आकलन
- WINDS से ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर का मौसम डेटा
- NCIP से किसानों का पंजीकरण और क्लेम रिकॉर्ड
- DigiClaim से बीमा राशि का डिजिटल भुगतान
- CLAP App से खेत स्तर पर फसल नुकसान का रिकॉर्ड
- CCE Agri App से फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े अपलोड करना
इन तकनीकों से फसल नुकसान का आकलन ज्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
YES-TECH से होगा फसल की उपज का वैज्ञानिक आकलन
YES-TECH का पूरा नाम Yield Estimation System Based on Technology है। इस प्रणाली में रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों के माध्यम से फसल की संभावित उपज का आकलन किया जाता है।
YES-TECH को खरीफ 2023 से धान और गेहूं के लिए लागू किया गया था। इसके बाद खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। उपज आकलन में YES-TECH से प्राप्त आंकड़ों को कम से कम 30 प्रतिशत वेटेज देना निर्धारित किया गया है।
YES-TECH से किसानों को क्या फायदा होगा?
इस तकनीक से उपज और फसल नुकसान का आकलन केवल मैनुअल सर्वे पर निर्भर नहीं रहेगा। सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल होने से:
- फसल उत्पादन का अधिक वैज्ञानिक अनुमान तैयार होगा।
- नुकसान के आकलन में मानवीय गलती कम हो सकती है।
- राज्य सरकार और बीमा कंपनी के बीच आंकड़ों से जुड़े विवाद घट सकते हैं।
- क्लेम की गणना अधिक पारदर्शी हो सकती है।
- किसानों को बीमा राशि मिलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में YES-TECH को 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। मध्य प्रदेश ने तकनीक आधारित उपज को 100 प्रतिशत वेटेज दिया, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत तथा ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत वेटेज दिया।
WINDS से गांव स्तर तक मिलेगा मौसम का सटीक डेटा
WINDS का पूरा नाम Weather Information Network and Data System है। इसका उद्देश्य देशभर में स्वचालित मौसम केंद्र यानी AWS और स्वचालित वर्षामापी यानी ARG का नेटवर्क तैयार करना है।
इस नेटवर्क से लंबे समय का हाइपरलोकल मौसम डेटा एकत्र किया जाएगा। यह जानकारी फसल बीमा के साथ-साथ कृषि सलाह, मौसम पूर्वानुमान और आपदा जोखिम प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकती है।
WINDS के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर Automatic Weather Stations और ग्राम पंचायत स्तर पर Automatic Rain Gauges स्थापित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य मौजूदा नेटवर्क की तुलना में मौसम उपकरणों का घनत्व लगभग पांच गुना बढ़ाना है।
सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में WINDS लागू
सरकार के अनुसार WINDS को असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनाया गया है।
इन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में:
- 16,843 स्थानों पर उपकरण लगाने की मंजूरी दी गई है।
- 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा किया गया है।
- 892 AWS और ARG उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं।
स्थानीय मौसम का बेहतर रिकॉर्ड उपलब्ध होने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी क्षेत्र में कितनी बारिश हुई, सूखे की स्थिति कितनी गंभीर थी या किसी मौसम घटना से फसल को कितना नुकसान पहुंचा।
NCIP पोर्टल से डिजिटल हुई फसल बीमा प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने National Crop Insurance Portal यानी NCIP को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित जानकारी का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है।
इस पोर्टल के माध्यम से:
- किसान ऑनलाइन फसल बीमा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।
- बीमित किसान और फसल का विवरण दर्ज किया जाता है।
- प्रीमियम एवं सरकारी सब्सिडी का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- फसल नुकसान और क्लेम की जानकारी साझा की जाती है।
- स्वीकृत क्लेम राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
एक ही पोर्टल पर जानकारी उपलब्ध होने से सरकार, बीमा कंपनियों, बैंकों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलती है।
DigiClaim Module से सीधे बैंक खाते में आएगा क्लेम
फसल बीमा दावों के भुगतान की निगरानी के लिए सरकार ने DigiClaim Module को शुरू किया है। यह मॉड्यूल खरीफ 2022 से क्लेम भुगतान के लिए संचालित किया जा रहा है।
DigiClaim में National Crop Insurance Portal को Public Finance Management System और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे स्वीकृत बीमा दावा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेजा जा सकता है।
इस डिजिटल व्यवस्था से:
- भुगतान की स्थिति की निगरानी बेहतर होती है।
- मैनुअल प्रक्रिया कम होती है।
- गलत खाते में भुगतान या भुगतान वापस होने की समस्या घट सकती है।
- क्लेम प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बन सकती है।
- पात्र किसान तक राशि सीधे पहुंच सकती है।
क्लेम में देरी पर बीमा कंपनी पर लगेगी 12 प्रतिशत पेनल्टी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत समय पर क्लेम भुगतान नहीं होने पर बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान लागू किया गया है। खरीफ 2024 से बीमा कंपनी द्वारा भुगतान में देरी होने पर इस पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से स्वतः की जाती है।
इसके अलावा खरीफ 2025 से राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी होने पर भी 12 प्रतिशत पेनल्टी लगाई जाती है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व में कई दावे राज्य सरकार के हिस्से की सब्सिडी में देरी या बीमा कंपनी द्वारा भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण लंबित हो जाते थे।
राज्य सरकारों के लिए एस्क्रो खाता अनिवार्य
राज्यों द्वारा प्रीमियम का हिस्सा समय पर जमा कराने के लिए खरीफ 2025 से एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारों को योजना के प्रावधानों के अनुसार अपना प्रीमियम हिस्सा अग्रिम रूप से इस खाते में जमा करना होता है।
सरकार ने केंद्र के प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्य के हिस्से से अलग करने की व्यवस्था भी लागू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हिस्से में देरी होने के बावजूद किसान को केंद्र सरकार के हिस्से से संबंधित आनुपातिक क्लेम मिल सके।
CLAP App से खेत स्तर पर दर्ज होगा फसल नुकसान
फसल नुकसान के डिजिटल आकलन के लिए Crop Loss Assessment App यानी CLAP विकसित किया गया है। यह मोबाइल ऐप विशेष रूप से स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए बनाया गया है।
CLAP App के माध्यम से:
- व्यक्तिगत खेत का निरीक्षण दर्ज किया जा सकता है।
- प्रभावित जमीन और फसल का विवरण रिकॉर्ड किया जा सकता है।
- स्थानीय आपदा से हुए नुकसान का डिजिटल प्रमाण तैयार किया जा सकता है।
- फसल कटाई के बाद हुए नुकसान की जानकारी दर्ज की जा सकती है।
- बीमा कंपनी और संबंधित विभाग को नुकसान का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए CLAP App का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
CCE Agri App से कम होगी कागजी प्रक्रिया
फसल की वास्तविक उपज जानने के लिए सरकार द्वारा फसल कटाई प्रयोग यानी Crop Cutting Experiments कराए जाते हैं। अब इन प्रयोगों के आंकड़ों को CCE Agri App के माध्यम से एकत्र करके NCIP पर अपलोड किया जा रहा है।
डिजिटल डेटा संग्रह से रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध हो सकता है और आंकड़ों में होने वाली गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ राज्य के भूमि रिकॉर्ड को भी NCIP से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान, खेत और बीमित फसल की जानकारी का मिलान आसान हो सके।
किसानों को इन नई तकनीकों से क्या लाभ मिलेगा?
नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ फसल नुकसान के आकलन में पारदर्शिता बढ़ना है। पहले कई बार किसान के खेत में वास्तविक नुकसान और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर होने की शिकायत सामने आती थी। मौसम स्टेशन, रिमोट सेंसिंग और मोबाइल ऐप से प्राप्त आंकड़े इस अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
किसानों को संभावित रूप से ये लाभ मिलेंगे:
- फसल नुकसान का अधिक सटीक आकलन।
- क्लेम संबंधी विवादों में कमी।
- बीमा दावे की बेहतर डिजिटल निगरानी।
- पात्र किसान के बैंक खाते में सीधा भुगतान।
- स्थानीय मौसम और वर्षा का विश्वसनीय रिकॉर्ड।
- भुगतान में देरी करने वाली संस्था की जवाबदेही।
- कागजी प्रक्रिया और मैनुअल गलतियों में कमी।
हालांकि क्लेम मिलने का समय नुकसान की सूचना, सर्वे, दस्तावेज, राज्य सरकार की प्रक्रिया और संबंधित बीमा कंपनी द्वारा दावे की स्वीकृति पर भी निर्भर करेगा।
फसल खराब होने पर किसान क्या करें?
किसान को फसल नुकसान होने पर केवल सरकारी सर्वे का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्थानीय आपदा या फसल कटाई के बाद नुकसान होने की स्थिति में किसान को निर्धारित समय के भीतर अपनी बीमा कंपनी, बैंक, कृषि विभाग या आधिकारिक फसल बीमा माध्यम से सूचना देनी चाहिए।
नुकसान की सूचना देते समय किसान को ये चीजें सुरक्षित रखनी चाहिए:
- फसल बीमा पॉलिसी या आवेदन संख्या
- आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण
- खेत और खसरा संख्या की जानकारी
- क्षतिग्रस्त फसल की फोटो एवं वीडियो
- नुकसान होने की तारीख और कारण
- शिकायत या सूचना दर्ज कराने का प्रमाण
किसान अपने आवेदन और क्लेम की स्थिति आधिकारिक प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल तथा संबंधित बीमा कंपनी के माध्यम से जांच सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में YES-TECH, WINDS, DigiClaim, NCIP, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का उपयोग भारतीय फसल बीमा व्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रिमोट सेंसिंग से उपज का वैज्ञानिक आकलन, गांव स्तर का मौसम डेटा, खेत स्तर पर डिजिटल नुकसान रिकॉर्ड और सीधे बैंक खाते में क्लेम भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से किसानों को ज्यादा पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद है। हालांकि किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय पर फसल बीमा कराएं, पॉलिसी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और नुकसान होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तुरंत सूचना दर्ज कराएं।
ऐसी ही कृषि योजनाओं, खेती की तकनीक, मौसम, मंडी भाव और किसान समाचारों के लिए eKhetibari के साथ जुड़े रहें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की नई तकनीकों से जुड़े FAQs
प्रश्न 1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कौन-कौन सी नई तकनीक इस्तेमाल हो रही है?
योजना में YES-TECH, WINDS, National Crop Insurance Portal, DigiClaim Module, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रश्न 2. YES-TECH क्या है?
YES-TECH रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों की मदद से फसल की उपज का आकलन करने वाली प्रणाली है। इसका उद्देश्य उपज का निष्पक्ष और वैज्ञानिक अनुमान तैयार करना है।
प्रश्न 3. WINDS से किसानों को क्या फायदा होगा?
WINDS के माध्यम से ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक स्थानीय बारिश और मौसम का डेटा एकत्र किया जाएगा। यह डेटा फसल नुकसान के आकलन और कृषि परामर्श में मदद कर सकता है।
प्रश्न 4. DigiClaim Module कैसे काम करता है?
DigiClaim, NCIP को PFMS और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ता है। इसके माध्यम से स्वीकृत क्लेम किसान के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाता है।
प्रश्न 5. CLAP App का उपयोग किस लिए किया जाता है?
CLAP App से स्थानीय आपदा और फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का व्यक्तिगत खेत एवं जमीन के स्तर पर डिजिटल आकलन किया जाता है।
प्रश्न 6. बीमा कंपनी क्लेम देने में देरी करे तो क्या होगा?
खरीफ 2024 से समय पर क्लेम भुगतान नहीं करने वाली बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से की जाती है।
प्रश्न 7. क्या नई तकनीक लागू होने के बाद क्लेम तुरंत मिलेगा?
नई तकनीक का उद्देश्य आकलन और भुगतान प्रक्रिया को तेज तथा पारदर्शी बनाना है। वास्तविक भुगतान का समय नुकसान की सूचना, दस्तावेजों, सर्वे और क्लेम की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: योजना के नियम, अधिसूचित फसलें, अंतिम तारीख और आवेदन प्रक्रिया राज्य तथा फसल सीजन के अनुसार अलग हो सकती है। किसान आवेदन या क्लेम से पहले आधिकारिक PMFBY पोर्टल, कृषि विभाग या संबंधित बीमा कंपनी से नवीनतम जानकारी जरूर प्राप्त करें।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव: नई तकनीक से होगा नुकसान का आकलन, किसानों को जल्द मिलेगा क्लेम
प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश के कारण फसल खराब होने पर किसानों को सबसे अधिक चिंता बीमा क्लेम मिलने की होती है। कई बार नुकसान का सर्वे पूरा होने, उपज का आकलन करने और बीमा राशि जारी होने में समय लग जाता है। अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 को ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही है।
इसके तहत फसल नुकसान और उपज का आकलन करने के लिए YES-TECH, मौसम की स्थानीय जानकारी के लिए WINDS, डिजिटल भुगतान के लिए DigiClaim Module और खेत स्तर पर नुकसान दर्ज करने के लिए CLAP App जैसी तकनीकों को योजना से जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करना, विवाद कम करना और पात्र किसानों तक बीमा राशि समय पर पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में क्या बदलाव हुआ है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के अंतर्गत पहले फसल उत्पादन और नुकसान का आकलन मुख्य रूप से फसल कटाई प्रयोग एवं स्थानीय सर्वे के आधार पर किया जाता था। अब इन प्रक्रियाओं के साथ रिमोट सेंसिंग, मौसम केंद्र, डिजिटल मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों का भी उपयोग किया जा रहा है।
सरकार द्वारा योजना में मुख्य रूप से निम्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है:
- YES-TECH से रिमोट सेंसिंग आधारित उपज का आकलन
- WINDS से ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर का मौसम डेटा
- NCIP से किसानों का पंजीकरण और क्लेम रिकॉर्ड
- DigiClaim से बीमा राशि का डिजिटल भुगतान
- CLAP App से खेत स्तर पर फसल नुकसान का रिकॉर्ड
- CCE Agri App से फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े अपलोड करना
इन तकनीकों से फसल नुकसान का आकलन ज्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
YES-TECH से होगा फसल की उपज का वैज्ञानिक आकलन
YES-TECH का पूरा नाम Yield Estimation System Based on Technology है। इस प्रणाली में रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों के माध्यम से फसल की संभावित उपज का आकलन किया जाता है।
YES-TECH को खरीफ 2023 से धान और गेहूं के लिए लागू किया गया था। इसके बाद खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। उपज आकलन में YES-TECH से प्राप्त आंकड़ों को कम से कम 30 प्रतिशत वेटेज देना निर्धारित किया गया है।
YES-TECH से किसानों को क्या फायदा होगा?
इस तकनीक से उपज और फसल नुकसान का आकलन केवल मैनुअल सर्वे पर निर्भर नहीं रहेगा। सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल होने से:
- फसल उत्पादन का अधिक वैज्ञानिक अनुमान तैयार होगा।
- नुकसान के आकलन में मानवीय गलती कम हो सकती है।
- राज्य सरकार और बीमा कंपनी के बीच आंकड़ों से जुड़े विवाद घट सकते हैं।
- क्लेम की गणना अधिक पारदर्शी हो सकती है।
- किसानों को बीमा राशि मिलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में YES-TECH को 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। मध्य प्रदेश ने तकनीक आधारित उपज को 100 प्रतिशत वेटेज दिया, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत तथा ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत वेटेज दिया।
WINDS से गांव स्तर तक मिलेगा मौसम का सटीक डेटा
WINDS का पूरा नाम Weather Information Network and Data System है। इसका उद्देश्य देशभर में स्वचालित मौसम केंद्र यानी AWS और स्वचालित वर्षामापी यानी ARG का नेटवर्क तैयार करना है।
इस नेटवर्क से लंबे समय का हाइपरलोकल मौसम डेटा एकत्र किया जाएगा। यह जानकारी फसल बीमा के साथ-साथ कृषि सलाह, मौसम पूर्वानुमान और आपदा जोखिम प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकती है।
WINDS के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर Automatic Weather Stations और ग्राम पंचायत स्तर पर Automatic Rain Gauges स्थापित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य मौजूदा नेटवर्क की तुलना में मौसम उपकरणों का घनत्व लगभग पांच गुना बढ़ाना है।
सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में WINDS लागू
सरकार के अनुसार WINDS को असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनाया गया है।
इन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में:
- 16,843 स्थानों पर उपकरण लगाने की मंजूरी दी गई है।
- 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा किया गया है।
- 892 AWS और ARG उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं।
स्थानीय मौसम का बेहतर रिकॉर्ड उपलब्ध होने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी क्षेत्र में कितनी बारिश हुई, सूखे की स्थिति कितनी गंभीर थी या किसी मौसम घटना से फसल को कितना नुकसान पहुंचा।
NCIP पोर्टल से डिजिटल हुई फसल बीमा प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने National Crop Insurance Portal यानी NCIP को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित जानकारी का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है।
इस पोर्टल के माध्यम से:
- किसान ऑनलाइन फसल बीमा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।
- बीमित किसान और फसल का विवरण दर्ज किया जाता है।
- प्रीमियम एवं सरकारी सब्सिडी का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- फसल नुकसान और क्लेम की जानकारी साझा की जाती है।
- स्वीकृत क्लेम राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
एक ही पोर्टल पर जानकारी उपलब्ध होने से सरकार, बीमा कंपनियों, बैंकों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलती है।
DigiClaim Module से सीधे बैंक खाते में आएगा क्लेम
फसल बीमा दावों के भुगतान की निगरानी के लिए सरकार ने DigiClaim Module को शुरू किया है। यह मॉड्यूल खरीफ 2022 से क्लेम भुगतान के लिए संचालित किया जा रहा है।
DigiClaim में National Crop Insurance Portal को Public Finance Management System और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे स्वीकृत बीमा दावा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेजा जा सकता है।
इस डिजिटल व्यवस्था से:
- भुगतान की स्थिति की निगरानी बेहतर होती है।
- मैनुअल प्रक्रिया कम होती है।
- गलत खाते में भुगतान या भुगतान वापस होने की समस्या घट सकती है।
- क्लेम प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बन सकती है।
- पात्र किसान तक राशि सीधे पहुंच सकती है।
क्लेम में देरी पर बीमा कंपनी पर लगेगी 12 प्रतिशत पेनल्टी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत समय पर क्लेम भुगतान नहीं होने पर बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान लागू किया गया है। खरीफ 2024 से बीमा कंपनी द्वारा भुगतान में देरी होने पर इस पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से स्वतः की जाती है।
इसके अलावा खरीफ 2025 से राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी होने पर भी 12 प्रतिशत पेनल्टी लगाई जाती है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व में कई दावे राज्य सरकार के हिस्से की सब्सिडी में देरी या बीमा कंपनी द्वारा भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण लंबित हो जाते थे।
राज्य सरकारों के लिए एस्क्रो खाता अनिवार्य
राज्यों द्वारा प्रीमियम का हिस्सा समय पर जमा कराने के लिए खरीफ 2025 से एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारों को योजना के प्रावधानों के अनुसार अपना प्रीमियम हिस्सा अग्रिम रूप से इस खाते में जमा करना होता है।
सरकार ने केंद्र के प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्य के हिस्से से अलग करने की व्यवस्था भी लागू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हिस्से में देरी होने के बावजूद किसान को केंद्र सरकार के हिस्से से संबंधित आनुपातिक क्लेम मिल सके।
CLAP App से खेत स्तर पर दर्ज होगा फसल नुकसान
फसल नुकसान के डिजिटल आकलन के लिए Crop Loss Assessment App यानी CLAP विकसित किया गया है। यह मोबाइल ऐप विशेष रूप से स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए बनाया गया है।
CLAP App के माध्यम से:
- व्यक्तिगत खेत का निरीक्षण दर्ज किया जा सकता है।
- प्रभावित जमीन और फसल का विवरण रिकॉर्ड किया जा सकता है।
- स्थानीय आपदा से हुए नुकसान का डिजिटल प्रमाण तैयार किया जा सकता है।
- फसल कटाई के बाद हुए नुकसान की जानकारी दर्ज की जा सकती है।
- बीमा कंपनी और संबंधित विभाग को नुकसान का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए CLAP App का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
CCE Agri App से कम होगी कागजी प्रक्रिया
फसल की वास्तविक उपज जानने के लिए सरकार द्वारा फसल कटाई प्रयोग यानी Crop Cutting Experiments कराए जाते हैं। अब इन प्रयोगों के आंकड़ों को CCE Agri App के माध्यम से एकत्र करके NCIP पर अपलोड किया जा रहा है।
डिजिटल डेटा संग्रह से रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध हो सकता है और आंकड़ों में होने वाली गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ राज्य के भूमि रिकॉर्ड को भी NCIP से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान, खेत और बीमित फसल की जानकारी का मिलान आसान हो सके।
किसानों को इन नई तकनीकों से क्या लाभ मिलेगा?
नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ फसल नुकसान के आकलन में पारदर्शिता बढ़ना है। पहले कई बार किसान के खेत में वास्तविक नुकसान और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर होने की शिकायत सामने आती थी। मौसम स्टेशन, रिमोट सेंसिंग और मोबाइल ऐप से प्राप्त आंकड़े इस अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
किसानों को संभावित रूप से ये लाभ मिलेंगे:
- फसल नुकसान का अधिक सटीक आकलन।
- क्लेम संबंधी विवादों में कमी।
- बीमा दावे की बेहतर डिजिटल निगरानी।
- पात्र किसान के बैंक खाते में सीधा भुगतान।
- स्थानीय मौसम और वर्षा का विश्वसनीय रिकॉर्ड।
- भुगतान में देरी करने वाली संस्था की जवाबदेही।
- कागजी प्रक्रिया और मैनुअल गलतियों में कमी।
हालांकि क्लेम मिलने का समय नुकसान की सूचना, सर्वे, दस्तावेज, राज्य सरकार की प्रक्रिया और संबंधित बीमा कंपनी द्वारा दावे की स्वीकृति पर भी निर्भर करेगा।
फसल खराब होने पर किसान क्या करें?
किसान को फसल नुकसान होने पर केवल सरकारी सर्वे का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्थानीय आपदा या फसल कटाई के बाद नुकसान होने की स्थिति में किसान को निर्धारित समय के भीतर अपनी बीमा कंपनी, बैंक, कृषि विभाग या आधिकारिक फसल बीमा माध्यम से सूचना देनी चाहिए।
नुकसान की सूचना देते समय किसान को ये चीजें सुरक्षित रखनी चाहिए:
- फसल बीमा पॉलिसी या आवेदन संख्या
- आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण
- खेत और खसरा संख्या की जानकारी
- क्षतिग्रस्त फसल की फोटो एवं वीडियो
- नुकसान होने की तारीख और कारण
- शिकायत या सूचना दर्ज कराने का प्रमाण
किसान अपने आवेदन और क्लेम की स्थिति आधिकारिक प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल तथा संबंधित बीमा कंपनी के माध्यम से जांच सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में YES-TECH, WINDS, DigiClaim, NCIP, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का उपयोग भारतीय फसल बीमा व्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रिमोट सेंसिंग से उपज का वैज्ञानिक आकलन, गांव स्तर का मौसम डेटा, खेत स्तर पर डिजिटल नुकसान रिकॉर्ड और सीधे बैंक खाते में क्लेम भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से किसानों को ज्यादा पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद है। हालांकि किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय पर फसल बीमा कराएं, पॉलिसी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और नुकसान होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तुरंत सूचना दर्ज कराएं।
ऐसी ही कृषि योजनाओं, खेती की तकनीक, मौसम, मंडी भाव और किसान समाचारों के लिए eKhetibari के साथ जुड़े रहें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की नई तकनीकों से जुड़े FAQs
प्रश्न 1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कौन-कौन सी नई तकनीक इस्तेमाल हो रही है?
योजना में YES-TECH, WINDS, National Crop Insurance Portal, DigiClaim Module, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रश्न 2. YES-TECH क्या है?
YES-TECH रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों की मदद से फसल की उपज का आकलन करने वाली प्रणाली है। इसका उद्देश्य उपज का निष्पक्ष और वैज्ञानिक अनुमान तैयार करना है।
प्रश्न 3. WINDS से किसानों को क्या फायदा होगा?
WINDS के माध्यम से ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक स्थानीय बारिश और मौसम का डेटा एकत्र किया जाएगा। यह डेटा फसल नुकसान के आकलन और कृषि परामर्श में मदद कर सकता है।
प्रश्न 4. DigiClaim Module कैसे काम करता है?
DigiClaim, NCIP को PFMS और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ता है। इसके माध्यम से स्वीकृत क्लेम किसान के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाता है।
प्रश्न 5. CLAP App का उपयोग किस लिए किया जाता है?
CLAP App से स्थानीय आपदा और फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का व्यक्तिगत खेत एवं जमीन के स्तर पर डिजिटल आकलन किया जाता है।
प्रश्न 6. बीमा कंपनी क्लेम देने में देरी करे तो क्या होगा?
खरीफ 2024 से समय पर क्लेम भुगतान नहीं करने वाली बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से की जाती है।
प्रश्न 7. क्या नई तकनीक लागू होने के बाद क्लेम तुरंत मिलेगा?
नई तकनीक का उद्देश्य आकलन और भुगतान प्रक्रिया को तेज तथा पारदर्शी बनाना है। वास्तविक भुगतान का समय नुकसान की सूचना, दस्तावेजों, सर्वे और क्लेम की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: योजना के नियम, अधिसूचित फसलें, अंतिम तारीख और आवेदन प्रक्रिया राज्य तथा फसल सीजन के अनुसार अलग हो सकती है। किसान आवेदन या क्लेम से पहले आधिकारिक PMFBY पोर्टल, कृषि विभाग या संबंधित बीमा कंपनी से नवीनतम जानकारी जरूर प्राप्त करें।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव: नई तकनीक से होगा नुकसान का आकलन, किसानों को जल्द मिलेगा क्लेम
प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश के कारण फसल खराब होने पर किसानों को सबसे अधिक चिंता बीमा क्लेम मिलने की होती है। कई बार नुकसान का सर्वे पूरा होने, उपज का आकलन करने और बीमा राशि जारी होने में समय लग जाता है। अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 को ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही है।
इसके तहत फसल नुकसान और उपज का आकलन करने के लिए YES-TECH, मौसम की स्थानीय जानकारी के लिए WINDS, डिजिटल भुगतान के लिए DigiClaim Module और खेत स्तर पर नुकसान दर्ज करने के लिए CLAP App जैसी तकनीकों को योजना से जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करना, विवाद कम करना और पात्र किसानों तक बीमा राशि समय पर पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में क्या बदलाव हुआ है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के अंतर्गत पहले फसल उत्पादन और नुकसान का आकलन मुख्य रूप से फसल कटाई प्रयोग एवं स्थानीय सर्वे के आधार पर किया जाता था। अब इन प्रक्रियाओं के साथ रिमोट सेंसिंग, मौसम केंद्र, डिजिटल मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों का भी उपयोग किया जा रहा है।
सरकार द्वारा योजना में मुख्य रूप से निम्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है:
- YES-TECH से रिमोट सेंसिंग आधारित उपज का आकलन
- WINDS से ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर का मौसम डेटा
- NCIP से किसानों का पंजीकरण और क्लेम रिकॉर्ड
- DigiClaim से बीमा राशि का डिजिटल भुगतान
- CLAP App से खेत स्तर पर फसल नुकसान का रिकॉर्ड
- CCE Agri App से फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े अपलोड करना
इन तकनीकों से फसल नुकसान का आकलन ज्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
YES-TECH से होगा फसल की उपज का वैज्ञानिक आकलन
YES-TECH का पूरा नाम Yield Estimation System Based on Technology है। इस प्रणाली में रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों के माध्यम से फसल की संभावित उपज का आकलन किया जाता है।
YES-TECH को खरीफ 2023 से धान और गेहूं के लिए लागू किया गया था। इसके बाद खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। उपज आकलन में YES-TECH से प्राप्त आंकड़ों को कम से कम 30 प्रतिशत वेटेज देना निर्धारित किया गया है।
YES-TECH से किसानों को क्या फायदा होगा?
इस तकनीक से उपज और फसल नुकसान का आकलन केवल मैनुअल सर्वे पर निर्भर नहीं रहेगा। सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल होने से:
- फसल उत्पादन का अधिक वैज्ञानिक अनुमान तैयार होगा।
- नुकसान के आकलन में मानवीय गलती कम हो सकती है।
- राज्य सरकार और बीमा कंपनी के बीच आंकड़ों से जुड़े विवाद घट सकते हैं।
- क्लेम की गणना अधिक पारदर्शी हो सकती है।
- किसानों को बीमा राशि मिलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में YES-TECH को 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। मध्य प्रदेश ने तकनीक आधारित उपज को 100 प्रतिशत वेटेज दिया, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत तथा ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत वेटेज दिया।
WINDS से गांव स्तर तक मिलेगा मौसम का सटीक डेटा
WINDS का पूरा नाम Weather Information Network and Data System है। इसका उद्देश्य देशभर में स्वचालित मौसम केंद्र यानी AWS और स्वचालित वर्षामापी यानी ARG का नेटवर्क तैयार करना है।
इस नेटवर्क से लंबे समय का हाइपरलोकल मौसम डेटा एकत्र किया जाएगा। यह जानकारी फसल बीमा के साथ-साथ कृषि सलाह, मौसम पूर्वानुमान और आपदा जोखिम प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकती है।
WINDS के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर Automatic Weather Stations और ग्राम पंचायत स्तर पर Automatic Rain Gauges स्थापित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य मौजूदा नेटवर्क की तुलना में मौसम उपकरणों का घनत्व लगभग पांच गुना बढ़ाना है।
सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में WINDS लागू
सरकार के अनुसार WINDS को असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनाया गया है।
इन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में:
- 16,843 स्थानों पर उपकरण लगाने की मंजूरी दी गई है।
- 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा किया गया है।
- 892 AWS और ARG उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं।
स्थानीय मौसम का बेहतर रिकॉर्ड उपलब्ध होने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी क्षेत्र में कितनी बारिश हुई, सूखे की स्थिति कितनी गंभीर थी या किसी मौसम घटना से फसल को कितना नुकसान पहुंचा।
NCIP पोर्टल से डिजिटल हुई फसल बीमा प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने National Crop Insurance Portal यानी NCIP को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित जानकारी का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है।
इस पोर्टल के माध्यम से:
- किसान ऑनलाइन फसल बीमा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।
- बीमित किसान और फसल का विवरण दर्ज किया जाता है।
- प्रीमियम एवं सरकारी सब्सिडी का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- फसल नुकसान और क्लेम की जानकारी साझा की जाती है।
- स्वीकृत क्लेम राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
एक ही पोर्टल पर जानकारी उपलब्ध होने से सरकार, बीमा कंपनियों, बैंकों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलती है।
DigiClaim Module से सीधे बैंक खाते में आएगा क्लेम
फसल बीमा दावों के भुगतान की निगरानी के लिए सरकार ने DigiClaim Module को शुरू किया है। यह मॉड्यूल खरीफ 2022 से क्लेम भुगतान के लिए संचालित किया जा रहा है।
DigiClaim में National Crop Insurance Portal को Public Finance Management System और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे स्वीकृत बीमा दावा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेजा जा सकता है।
इस डिजिटल व्यवस्था से:
- भुगतान की स्थिति की निगरानी बेहतर होती है।
- मैनुअल प्रक्रिया कम होती है।
- गलत खाते में भुगतान या भुगतान वापस होने की समस्या घट सकती है।
- क्लेम प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बन सकती है।
- पात्र किसान तक राशि सीधे पहुंच सकती है।
क्लेम में देरी पर बीमा कंपनी पर लगेगी 12 प्रतिशत पेनल्टी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत समय पर क्लेम भुगतान नहीं होने पर बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान लागू किया गया है। खरीफ 2024 से बीमा कंपनी द्वारा भुगतान में देरी होने पर इस पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से स्वतः की जाती है।
इसके अलावा खरीफ 2025 से राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी होने पर भी 12 प्रतिशत पेनल्टी लगाई जाती है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व में कई दावे राज्य सरकार के हिस्से की सब्सिडी में देरी या बीमा कंपनी द्वारा भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण लंबित हो जाते थे।
राज्य सरकारों के लिए एस्क्रो खाता अनिवार्य
राज्यों द्वारा प्रीमियम का हिस्सा समय पर जमा कराने के लिए खरीफ 2025 से एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारों को योजना के प्रावधानों के अनुसार अपना प्रीमियम हिस्सा अग्रिम रूप से इस खाते में जमा करना होता है।
सरकार ने केंद्र के प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्य के हिस्से से अलग करने की व्यवस्था भी लागू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हिस्से में देरी होने के बावजूद किसान को केंद्र सरकार के हिस्से से संबंधित आनुपातिक क्लेम मिल सके।
CLAP App से खेत स्तर पर दर्ज होगा फसल नुकसान
फसल नुकसान के डिजिटल आकलन के लिए Crop Loss Assessment App यानी CLAP विकसित किया गया है। यह मोबाइल ऐप विशेष रूप से स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए बनाया गया है।
CLAP App के माध्यम से:
- व्यक्तिगत खेत का निरीक्षण दर्ज किया जा सकता है।
- प्रभावित जमीन और फसल का विवरण रिकॉर्ड किया जा सकता है।
- स्थानीय आपदा से हुए नुकसान का डिजिटल प्रमाण तैयार किया जा सकता है।
- फसल कटाई के बाद हुए नुकसान की जानकारी दर्ज की जा सकती है।
- बीमा कंपनी और संबंधित विभाग को नुकसान का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए CLAP App का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
CCE Agri App से कम होगी कागजी प्रक्रिया
फसल की वास्तविक उपज जानने के लिए सरकार द्वारा फसल कटाई प्रयोग यानी Crop Cutting Experiments कराए जाते हैं। अब इन प्रयोगों के आंकड़ों को CCE Agri App के माध्यम से एकत्र करके NCIP पर अपलोड किया जा रहा है।
डिजिटल डेटा संग्रह से रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध हो सकता है और आंकड़ों में होने वाली गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ राज्य के भूमि रिकॉर्ड को भी NCIP से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान, खेत और बीमित फसल की जानकारी का मिलान आसान हो सके।
किसानों को इन नई तकनीकों से क्या लाभ मिलेगा?
नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ फसल नुकसान के आकलन में पारदर्शिता बढ़ना है। पहले कई बार किसान के खेत में वास्तविक नुकसान और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर होने की शिकायत सामने आती थी। मौसम स्टेशन, रिमोट सेंसिंग और मोबाइल ऐप से प्राप्त आंकड़े इस अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
किसानों को संभावित रूप से ये लाभ मिलेंगे:
- फसल नुकसान का अधिक सटीक आकलन।
- क्लेम संबंधी विवादों में कमी।
- बीमा दावे की बेहतर डिजिटल निगरानी।
- पात्र किसान के बैंक खाते में सीधा भुगतान।
- स्थानीय मौसम और वर्षा का विश्वसनीय रिकॉर्ड।
- भुगतान में देरी करने वाली संस्था की जवाबदेही।
- कागजी प्रक्रिया और मैनुअल गलतियों में कमी।
हालांकि क्लेम मिलने का समय नुकसान की सूचना, सर्वे, दस्तावेज, राज्य सरकार की प्रक्रिया और संबंधित बीमा कंपनी द्वारा दावे की स्वीकृति पर भी निर्भर करेगा।
फसल खराब होने पर किसान क्या करें?
किसान को फसल नुकसान होने पर केवल सरकारी सर्वे का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्थानीय आपदा या फसल कटाई के बाद नुकसान होने की स्थिति में किसान को निर्धारित समय के भीतर अपनी बीमा कंपनी, बैंक, कृषि विभाग या आधिकारिक फसल बीमा माध्यम से सूचना देनी चाहिए।
नुकसान की सूचना देते समय किसान को ये चीजें सुरक्षित रखनी चाहिए:
- फसल बीमा पॉलिसी या आवेदन संख्या
- आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण
- खेत और खसरा संख्या की जानकारी
- क्षतिग्रस्त फसल की फोटो एवं वीडियो
- नुकसान होने की तारीख और कारण
- शिकायत या सूचना दर्ज कराने का प्रमाण
किसान अपने आवेदन और क्लेम की स्थिति आधिकारिक प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल तथा संबंधित बीमा कंपनी के माध्यम से जांच सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में YES-TECH, WINDS, DigiClaim, NCIP, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का उपयोग भारतीय फसल बीमा व्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रिमोट सेंसिंग से उपज का वैज्ञानिक आकलन, गांव स्तर का मौसम डेटा, खेत स्तर पर डिजिटल नुकसान रिकॉर्ड और सीधे बैंक खाते में क्लेम भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से किसानों को ज्यादा पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद है। हालांकि किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय पर फसल बीमा कराएं, पॉलिसी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और नुकसान होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तुरंत सूचना दर्ज कराएं।
ऐसी ही कृषि योजनाओं, खेती की तकनीक, मौसम, मंडी भाव और किसान समाचारों के लिए eKhetibari के साथ जुड़े रहें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की नई तकनीकों से जुड़े FAQs
प्रश्न 1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कौन-कौन सी नई तकनीक इस्तेमाल हो रही है?
योजना में YES-TECH, WINDS, National Crop Insurance Portal, DigiClaim Module, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रश्न 2. YES-TECH क्या है?
YES-TECH रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों की मदद से फसल की उपज का आकलन करने वाली प्रणाली है। इसका उद्देश्य उपज का निष्पक्ष और वैज्ञानिक अनुमान तैयार करना है।
प्रश्न 3. WINDS से किसानों को क्या फायदा होगा?
WINDS के माध्यम से ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक स्थानीय बारिश और मौसम का डेटा एकत्र किया जाएगा। यह डेटा फसल नुकसान के आकलन और कृषि परामर्श में मदद कर सकता है।
प्रश्न 4. DigiClaim Module कैसे काम करता है?
DigiClaim, NCIP को PFMS और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ता है। इसके माध्यम से स्वीकृत क्लेम किसान के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाता है।
प्रश्न 5. CLAP App का उपयोग किस लिए किया जाता है?
CLAP App से स्थानीय आपदा और फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का व्यक्तिगत खेत एवं जमीन के स्तर पर डिजिटल आकलन किया जाता है।
प्रश्न 6. बीमा कंपनी क्लेम देने में देरी करे तो क्या होगा?
खरीफ 2024 से समय पर क्लेम भुगतान नहीं करने वाली बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से की जाती है।
प्रश्न 7. क्या नई तकनीक लागू होने के बाद क्लेम तुरंत मिलेगा?
नई तकनीक का उद्देश्य आकलन और भुगतान प्रक्रिया को तेज तथा पारदर्शी बनाना है। वास्तविक भुगतान का समय नुकसान की सूचना, दस्तावेजों, सर्वे और क्लेम की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: योजना के नियम, अधिसूचित फसलें, अंतिम तारीख और आवेदन प्रक्रिया राज्य तथा फसल सीजन के अनुसार अलग हो सकती है। किसान आवेदन या क्लेम से पहले आधिकारिक PMFBY पोर्टल, कृषि विभाग या संबंधित बीमा कंपनी से नवीनतम जानकारी जरूर प्राप्त करें।प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़ा बदलाव: नई तकनीक से होगा नुकसान का आकलन, किसानों को जल्द मिलेगा क्लेम
प्राकृतिक आपदा, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि या बेमौसम बारिश के कारण फसल खराब होने पर किसानों को सबसे अधिक चिंता बीमा क्लेम मिलने की होती है। कई बार नुकसान का सर्वे पूरा होने, उपज का आकलन करने और बीमा राशि जारी होने में समय लग जाता है। अब केंद्र सरकार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026 को ज्यादा पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए कई डिजिटल प्रणालियों का इस्तेमाल कर रही है।
इसके तहत फसल नुकसान और उपज का आकलन करने के लिए YES-TECH, मौसम की स्थानीय जानकारी के लिए WINDS, डिजिटल भुगतान के लिए DigiClaim Module और खेत स्तर पर नुकसान दर्ज करने के लिए CLAP App जैसी तकनीकों को योजना से जोड़ा गया है। सरकार का उद्देश्य नुकसान का सही रिकॉर्ड तैयार करना, विवाद कम करना और पात्र किसानों तक बीमा राशि समय पर पहुंचाना है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में क्या बदलाव हुआ है?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY के अंतर्गत पहले फसल उत्पादन और नुकसान का आकलन मुख्य रूप से फसल कटाई प्रयोग एवं स्थानीय सर्वे के आधार पर किया जाता था। अब इन प्रक्रियाओं के साथ रिमोट सेंसिंग, मौसम केंद्र, डिजिटल मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों का भी उपयोग किया जा रहा है।
सरकार द्वारा योजना में मुख्य रूप से निम्न तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है:
- YES-TECH से रिमोट सेंसिंग आधारित उपज का आकलन
- WINDS से ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर का मौसम डेटा
- NCIP से किसानों का पंजीकरण और क्लेम रिकॉर्ड
- DigiClaim से बीमा राशि का डिजिटल भुगतान
- CLAP App से खेत स्तर पर फसल नुकसान का रिकॉर्ड
- CCE Agri App से फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े अपलोड करना
इन तकनीकों से फसल नुकसान का आकलन ज्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी होने की उम्मीद है।
YES-TECH से होगा फसल की उपज का वैज्ञानिक आकलन
YES-TECH का पूरा नाम Yield Estimation System Based on Technology है। इस प्रणाली में रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों के माध्यम से फसल की संभावित उपज का आकलन किया जाता है।
YES-TECH को खरीफ 2023 से धान और गेहूं के लिए लागू किया गया था। इसके बाद खरीफ 2024 से सोयाबीन को भी इसमें शामिल किया गया। उपज आकलन में YES-TECH से प्राप्त आंकड़ों को कम से कम 30 प्रतिशत वेटेज देना निर्धारित किया गया है।
YES-TECH से किसानों को क्या फायदा होगा?
इस तकनीक से उपज और फसल नुकसान का आकलन केवल मैनुअल सर्वे पर निर्भर नहीं रहेगा। सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल होने से:
- फसल उत्पादन का अधिक वैज्ञानिक अनुमान तैयार होगा।
- नुकसान के आकलन में मानवीय गलती कम हो सकती है।
- राज्य सरकार और बीमा कंपनी के बीच आंकड़ों से जुड़े विवाद घट सकते हैं।
- क्लेम की गणना अधिक पारदर्शी हो सकती है।
- किसानों को बीमा राशि मिलने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में YES-TECH को 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। मध्य प्रदेश ने तकनीक आधारित उपज को 100 प्रतिशत वेटेज दिया, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50 प्रतिशत तथा ओडिशा और कर्नाटक ने 40 प्रतिशत वेटेज दिया।
WINDS से गांव स्तर तक मिलेगा मौसम का सटीक डेटा
WINDS का पूरा नाम Weather Information Network and Data System है। इसका उद्देश्य देशभर में स्वचालित मौसम केंद्र यानी AWS और स्वचालित वर्षामापी यानी ARG का नेटवर्क तैयार करना है।
इस नेटवर्क से लंबे समय का हाइपरलोकल मौसम डेटा एकत्र किया जाएगा। यह जानकारी फसल बीमा के साथ-साथ कृषि सलाह, मौसम पूर्वानुमान और आपदा जोखिम प्रबंधन में भी उपयोगी हो सकती है।
WINDS के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर Automatic Weather Stations और ग्राम पंचायत स्तर पर Automatic Rain Gauges स्थापित करने की योजना है। सरकार का लक्ष्य मौजूदा नेटवर्क की तुलना में मौसम उपकरणों का घनत्व लगभग पांच गुना बढ़ाना है।
सात राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में WINDS लागू
सरकार के अनुसार WINDS को असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में अपनाया गया है।
इन राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में:
- 16,843 स्थानों पर उपकरण लगाने की मंजूरी दी गई है।
- 1,188 स्थानों पर सिविल कार्य पूरा किया गया है।
- 892 AWS और ARG उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं।
स्थानीय मौसम का बेहतर रिकॉर्ड उपलब्ध होने से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी क्षेत्र में कितनी बारिश हुई, सूखे की स्थिति कितनी गंभीर थी या किसी मौसम घटना से फसल को कितना नुकसान पहुंचा।
NCIP पोर्टल से डिजिटल हुई फसल बीमा प्रक्रिया
केंद्र सरकार ने National Crop Insurance Portal यानी NCIP को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से संबंधित जानकारी का एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया है।
इस पोर्टल के माध्यम से:
- किसान ऑनलाइन फसल बीमा के लिए पंजीकरण कर सकते हैं।
- बीमित किसान और फसल का विवरण दर्ज किया जाता है।
- प्रीमियम एवं सरकारी सब्सिडी का रिकॉर्ड रखा जाता है।
- फसल नुकसान और क्लेम की जानकारी साझा की जाती है।
- स्वीकृत क्लेम राशि किसान के बैंक खाते में भेजी जाती है।
एक ही पोर्टल पर जानकारी उपलब्ध होने से सरकार, बीमा कंपनियों, बैंकों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिलती है।
DigiClaim Module से सीधे बैंक खाते में आएगा क्लेम
फसल बीमा दावों के भुगतान की निगरानी के लिए सरकार ने DigiClaim Module को शुरू किया है। यह मॉड्यूल खरीफ 2022 से क्लेम भुगतान के लिए संचालित किया जा रहा है।
DigiClaim में National Crop Insurance Portal को Public Finance Management System और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ा गया है। इससे स्वीकृत बीमा दावा इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से किसान के बैंक खाते में भेजा जा सकता है।
इस डिजिटल व्यवस्था से:
- भुगतान की स्थिति की निगरानी बेहतर होती है।
- मैनुअल प्रक्रिया कम होती है।
- गलत खाते में भुगतान या भुगतान वापस होने की समस्या घट सकती है।
- क्लेम प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बन सकती है।
- पात्र किसान तक राशि सीधे पहुंच सकती है।
क्लेम में देरी पर बीमा कंपनी पर लगेगी 12 प्रतिशत पेनल्टी
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत समय पर क्लेम भुगतान नहीं होने पर बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी का प्रावधान लागू किया गया है। खरीफ 2024 से बीमा कंपनी द्वारा भुगतान में देरी होने पर इस पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से स्वतः की जाती है।
इसके अलावा खरीफ 2025 से राज्य सरकार द्वारा अपने हिस्से की प्रीमियम सब्सिडी जारी करने में देरी होने पर भी 12 प्रतिशत पेनल्टी लगाई जाती है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पूर्व में कई दावे राज्य सरकार के हिस्से की सब्सिडी में देरी या बीमा कंपनी द्वारा भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं किए जाने के कारण लंबित हो जाते थे।
राज्य सरकारों के लिए एस्क्रो खाता अनिवार्य
राज्यों द्वारा प्रीमियम का हिस्सा समय पर जमा कराने के लिए खरीफ 2025 से एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य किया गया है। राज्य सरकारों को योजना के प्रावधानों के अनुसार अपना प्रीमियम हिस्सा अग्रिम रूप से इस खाते में जमा करना होता है।
सरकार ने केंद्र के प्रीमियम सब्सिडी हिस्से को राज्य के हिस्से से अलग करने की व्यवस्था भी लागू की है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य के हिस्से में देरी होने के बावजूद किसान को केंद्र सरकार के हिस्से से संबंधित आनुपातिक क्लेम मिल सके।
CLAP App से खेत स्तर पर दर्ज होगा फसल नुकसान
फसल नुकसान के डिजिटल आकलन के लिए Crop Loss Assessment App यानी CLAP विकसित किया गया है। यह मोबाइल ऐप विशेष रूप से स्थानीय प्राकृतिक आपदाओं और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए बनाया गया है।
CLAP App के माध्यम से:
- व्यक्तिगत खेत का निरीक्षण दर्ज किया जा सकता है।
- प्रभावित जमीन और फसल का विवरण रिकॉर्ड किया जा सकता है।
- स्थानीय आपदा से हुए नुकसान का डिजिटल प्रमाण तैयार किया जा सकता है।
- फसल कटाई के बाद हुए नुकसान की जानकारी दर्ज की जा सकती है।
- बीमा कंपनी और संबंधित विभाग को नुकसान का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सकता है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए CLAP App का उपयोग अनिवार्य किया गया है।
CCE Agri App से कम होगी कागजी प्रक्रिया
फसल की वास्तविक उपज जानने के लिए सरकार द्वारा फसल कटाई प्रयोग यानी Crop Cutting Experiments कराए जाते हैं। अब इन प्रयोगों के आंकड़ों को CCE Agri App के माध्यम से एकत्र करके NCIP पर अपलोड किया जा रहा है।
डिजिटल डेटा संग्रह से रिकॉर्ड समय पर उपलब्ध हो सकता है और आंकड़ों में होने वाली गलतियों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके साथ राज्य के भूमि रिकॉर्ड को भी NCIP से जोड़ा जा रहा है, जिससे किसान, खेत और बीमित फसल की जानकारी का मिलान आसान हो सके।
किसानों को इन नई तकनीकों से क्या लाभ मिलेगा?
नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ फसल नुकसान के आकलन में पारदर्शिता बढ़ना है। पहले कई बार किसान के खेत में वास्तविक नुकसान और सरकारी रिकॉर्ड के बीच अंतर होने की शिकायत सामने आती थी। मौसम स्टेशन, रिमोट सेंसिंग और मोबाइल ऐप से प्राप्त आंकड़े इस अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
किसानों को संभावित रूप से ये लाभ मिलेंगे:
- फसल नुकसान का अधिक सटीक आकलन।
- क्लेम संबंधी विवादों में कमी।
- बीमा दावे की बेहतर डिजिटल निगरानी।
- पात्र किसान के बैंक खाते में सीधा भुगतान।
- स्थानीय मौसम और वर्षा का विश्वसनीय रिकॉर्ड।
- भुगतान में देरी करने वाली संस्था की जवाबदेही।
- कागजी प्रक्रिया और मैनुअल गलतियों में कमी।
हालांकि क्लेम मिलने का समय नुकसान की सूचना, सर्वे, दस्तावेज, राज्य सरकार की प्रक्रिया और संबंधित बीमा कंपनी द्वारा दावे की स्वीकृति पर भी निर्भर करेगा।
फसल खराब होने पर किसान क्या करें?
किसान को फसल नुकसान होने पर केवल सरकारी सर्वे का इंतजार नहीं करना चाहिए। स्थानीय आपदा या फसल कटाई के बाद नुकसान होने की स्थिति में किसान को निर्धारित समय के भीतर अपनी बीमा कंपनी, बैंक, कृषि विभाग या आधिकारिक फसल बीमा माध्यम से सूचना देनी चाहिए।
नुकसान की सूचना देते समय किसान को ये चीजें सुरक्षित रखनी चाहिए:
- फसल बीमा पॉलिसी या आवेदन संख्या
- आधार कार्ड और बैंक खाते का विवरण
- खेत और खसरा संख्या की जानकारी
- क्षतिग्रस्त फसल की फोटो एवं वीडियो
- नुकसान होने की तारीख और कारण
- शिकायत या सूचना दर्ज कराने का प्रमाण
किसान अपने आवेदन और क्लेम की स्थिति आधिकारिक प्रधानमंत्री फसल बीमा पोर्टल तथा संबंधित बीमा कंपनी के माध्यम से जांच सकते हैं।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में YES-TECH, WINDS, DigiClaim, NCIP, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का उपयोग भारतीय फसल बीमा व्यवस्था को अधिक डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रिमोट सेंसिंग से उपज का वैज्ञानिक आकलन, गांव स्तर का मौसम डेटा, खेत स्तर पर डिजिटल नुकसान रिकॉर्ड और सीधे बैंक खाते में क्लेम भुगतान जैसी व्यवस्थाओं से किसानों को ज्यादा पारदर्शी सेवा मिलने की उम्मीद है। हालांकि किसानों के लिए जरूरी है कि वे समय पर फसल बीमा कराएं, पॉलिसी का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें और नुकसान होने पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तुरंत सूचना दर्ज कराएं।
ऐसी ही कृषि योजनाओं, खेती की तकनीक, मौसम, मंडी भाव और किसान समाचारों के लिए eKhetibari के साथ जुड़े रहें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की नई तकनीकों से जुड़े FAQs
प्रश्न 1. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कौन-कौन सी नई तकनीक इस्तेमाल हो रही है?
योजना में YES-TECH, WINDS, National Crop Insurance Portal, DigiClaim Module, CCE Agri App और CLAP App जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रश्न 2. YES-TECH क्या है?
YES-TECH रिमोट सेंसिंग और तकनीकी आंकड़ों की मदद से फसल की उपज का आकलन करने वाली प्रणाली है। इसका उद्देश्य उपज का निष्पक्ष और वैज्ञानिक अनुमान तैयार करना है।
प्रश्न 3. WINDS से किसानों को क्या फायदा होगा?
WINDS के माध्यम से ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर तक स्थानीय बारिश और मौसम का डेटा एकत्र किया जाएगा। यह डेटा फसल नुकसान के आकलन और कृषि परामर्श में मदद कर सकता है।
प्रश्न 4. DigiClaim Module कैसे काम करता है?
DigiClaim, NCIP को PFMS और बीमा कंपनियों की भुगतान प्रणाली से जोड़ता है। इसके माध्यम से स्वीकृत क्लेम किसान के बैंक खाते में इलेक्ट्रॉनिक रूप से भेजा जाता है।
प्रश्न 5. CLAP App का उपयोग किस लिए किया जाता है?
CLAP App से स्थानीय आपदा और फसल कटाई के बाद हुए नुकसान का व्यक्तिगत खेत एवं जमीन के स्तर पर डिजिटल आकलन किया जाता है।
प्रश्न 6. बीमा कंपनी क्लेम देने में देरी करे तो क्या होगा?
खरीफ 2024 से समय पर क्लेम भुगतान नहीं करने वाली बीमा कंपनी पर 12 प्रतिशत पेनल्टी की गणना NCIP के माध्यम से की जाती है।
प्रश्न 7. क्या नई तकनीक लागू होने के बाद क्लेम तुरंत मिलेगा?
नई तकनीक का उद्देश्य आकलन और भुगतान प्रक्रिया को तेज तथा पारदर्शी बनाना है। वास्तविक भुगतान का समय नुकसान की सूचना, दस्तावेजों, सर्वे और क्लेम की स्वीकृति पर निर्भर करेगा।
डिस्क्लेमर: योजना के नियम, अधिसूचित फसलें, अंतिम तारीख और आवेदन प्रक्रिया राज्य तथा फसल सीजन के अनुसार अलग हो सकती है। किसान आवेदन या क्लेम से पहले आधिकारिक PMFBY पोर्टल, कृषि विभाग या संबंधित बीमा कंपनी से नवीनतम जानकारी जरूर प्राप्त करें।

